शहीद सिदो-कान्हू को गिरिडीह ने दी श्रद्धांजलि

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आदिवासी समाज ने धूमधाम से मनाया हूल दिवस बेंगाबाद : बेंगाबाद-मधुपुर मुख्य मार्ग के करमजोरा मोड़ के समक्ष आदिवासी समाज ने धूमधाम से हूल दिवस मनाया. मुख्य अतिथि के रूप गांडेय विधायक प्रो. जयप्रकाश वर्मा उपस्थित थे. इससे पूर्व ग्रामीणों ने विधायक का स्वागत किया. प्रो वर्मा ने कहा कि देश की आजादी के पूर्व […]

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आदिवासी समाज ने धूमधाम से मनाया हूल दिवस

बेंगाबाद : बेंगाबाद-मधुपुर मुख्य मार्ग के करमजोरा मोड़ के समक्ष आदिवासी समाज ने धूमधाम से हूल दिवस मनाया. मुख्य अतिथि के रूप गांडेय विधायक प्रो. जयप्रकाश वर्मा उपस्थित थे. इससे पूर्व ग्रामीणों ने विधायक का स्वागत किया. प्रो वर्मा ने कहा कि देश की आजादी के पूर्व हूल क्रांति के अग्र दूत सिदो-कान्हू ने देश की आजादी में अहम भूमिका निभायी थी. ऐसे महान सपूतों से हमें प्रेरणा लेने की जरूरत है. डॉ राजेश पोद्दार ने कहा कि देश की आजादी में सभी जाति व धर्म के लोगों की अहम भागीदारी रही है. नुनूराम किस्कू उर्फ टाइगर ने कहा कि सिदो-कान्हू देश की महान विभूति थे.

कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन रविलाल हांसदा ने किया. मौके पर जयमंगल राय, थाना प्रभारी राजीव कुमार, बीडीओ मो.अनीस, मंजू मरांडी, रंजीत मरांडी, महेंद्र वर्मा, नुनूलाल मुमरू, श्याम लाल बेसरा, ललन हेम्ब्रम, रोबिन मरांडी, बुधनी हेंब्रम, बुधन हेंब्रम, देवन बेसरा, मो. मिराज आलम, दानीयन सोरेन समेत कई उपस्थित थे.

गिरिडीह : एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने भंडारीडीह स्थित कार्यालय में हूल दिवस मनाया. अध्यक्षता बैजनाथ प्रसाद वर्मा ने की. उपस्थित लोगों ने सिदो-कान्हू के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी. ग्राम स्वराज अभियान के रामदेव विश्वबंधु ने हूल दिवस की प्रासंगिकता व इतिहास पर चर्चा की.

30 जून 1855 को संथाल परगना के भोगनाडीह में दस हजार से अधिक लोग एक साथ जमा होकर अंगरेजों, सूदखोरों व जमींदारों के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया था. आंदोलन में बड़ी संख्या में आदिवासियों के साथ गैर आदिवासी भी शामिल थे. एकता परिषद के बैजनाथ प्रसाद वर्मा ने कहा कि सिदो-कान्हू के चलते ही संथाल परगना काश्तकारी कानून बना. लेकिन आज भी देशी-विदेशी पूंजीपति हमारी जमीन को लुटने में लगे है.

मौके पर सुरेंद्र वर्मा, कृष्ण कुमार वर्मा, विवेकानंद तिवारी, प्रकाश विश्वकर्मा, राजेंद्र वर्मा, रामप्रकाश राणा, सुजीत कुमार, सिकंदर प्रसाद कुशवाहा, हेमलाल हांसदा, पूनम सोरेन, छोटू किस्कू, अशोक प्रसाद आदि ने भी अपने विचार रखे.

माले व एआइपीएफ के दस प्रस्ताव पारित

भाकपा माले व एआइपीएफ द्वारा हूल दिवस पर झंडा मैदान में कार्यक्रम के दौरान दस प्रस्ताव पारित किये गये. माले नेता सीताराम सिंह ने सभा में पारित दस सूत्री प्रस्ताव को पढ़ कर सुनाया.

भूमि अधिकार और श्रम अधिकारों पर मोदी सरकार जघन्य हमला बंद करे, अडाणी समेत तमाम कॉरपोरेट पूंजीपतियों से किये गये एमओयू को वापस लेने, विस्थापन पर रोक लगाने, खाद्य सुरक्षा में तमाम लोगों को शामिल करने, आदिवासियों-दलितों और आंदोलनकारियों की फर्जी मुठभेड़ों में हत्या, झूठे मुकदमों और उत्पीड़न के लिए जिम्मेवार अधिकारियों को बरखास्त करने, मानव तस्करी व प्रदूषण पर रोक लगाने, महिला आरक्षण बिल संसद में पारित कराने, मनरेगा मजदूरों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी पांच रुपये करने एवं जीटी रोड व रेलवे लाइन चौड़ीकरण में तमाम किस्म की भूमि के बदले किसानों को चार गुणा मुआवजे की गारंटी करने आदि प्रस्ताव लिये गये.

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