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झारखंड में एक और मौत पर बवाल, गांव के लोग बोले ‘भूख से मौत’, प्रशासन बोला ठंड से

Updated at : 15 Jan 2018 5:02 PM (IST)
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झारखंड में एक और मौत पर बवाल, गांव के लोग बोले ‘भूख से मौत’, प्रशासन बोला ठंड से

गिरिडीह/रांची : झारखंड में एक और मौत पर बवाल मच गया है. झारखंड के गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में बुधनी साेरेन नामक एक आदिवासी महिला की मौत हुई है, जिसे एक पक्ष भूख से मौत का मामला बता रहा है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि बुधनी की मौत ठंड से हुई है. माले […]

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गिरिडीह/रांची : झारखंड में एक और मौत पर बवाल मच गया है. झारखंड के गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में बुधनी साेरेन नामक एक आदिवासी महिला की मौत हुई है, जिसे एक पक्ष भूख से मौत का मामला बता रहा है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि बुधनी की मौत ठंड से हुई है. माले विधायक राजकुमार यादव मौत की वजह भूख से जुड़ा बता रहे हैं. उन्होंने मामले को विधानसभा में उठाने की बात कही है. इससे पहले झारखंड के सिमडेगा जिले में संतोषी नामक एक बच्ची की कथित रूप से भूख से मौत हुई थी, जो राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खी बन गयी थी.

भारत सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत देश के हर नागरिक को ‘भोजन का अधिकार’ दिया है. फिर भी देश के किसी कोने में किसी की भूख से मौत हो जाये, तो यह दु:खद स्थिति होती है. इस संबंध में कुछ लोगों का कहना है कि महिला अपनी भूख मिटाने के लिए बेटे के स्कूल जाती थी, जहां वहां मध्याह्न भोजन खाया करती थी और इससे उसकी स्थिति समझी जा सकती है.

यदि अपना पेट भरने के लिए किसी मां को स्कूल जाकर मध्याह्न भोजन में से अपने बेटे के हिस्से का खाना खाना पड़े, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है, यह भी एक सवाल है?

जिस इलाके में महिला मरी है, वह झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री और झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) के सबसे बड़े नेता बाबूलाल मरांडी का गृह जिला है. लोगों का कहना है कि गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में स्थित सेवाटांड़ गांव की आदिवासी महिला बुधनी सोरेन ने तीन दिन से कुछ नहीं खाया था. जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर स्थित तिसरी प्रखंड के सेवाटांड़ गांव की बुधनी का बेटा अब इस दुनिया में अकेला रह गया है. उसके पिता की मौत पहले ही हो चुकी है.

जिला प्रशासन ने किया इनकार

गिरिडीह प्रशासन ने इस बात से इनकार किया है कि बुधनी की मौत भूख की वजह से हुई है. प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि महिला की पिछले सप्ताह ठंड के कारण उसकी मौत हो गयी. भूख से उसकी मौत नहीं हुई है. रविवार को सेवाटांड़ गांव में उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. बताया जाता है कि बुधनी ने टुड्डु हेम्ब्रम से दूसरी शादी की थी. एक साल पहले उसकी मौत हो गयी.

ग्रामीणों ने बताया कि बुधनी जंगल से पत्ते चुनकर दोना बनाती थी और उसे बेचकर जीवन यापन करती थी. कुछ दिनों पहले उसे ठंड लग गयी थी और वह घर से बाहर नहीं निकल पा रही थी. इसलिए अनाज खरीदने के पैसे उसके पास नहीं रह गये थे. गांव के एक व्यक्ति ने कहा, ‘कई बार वह अपने बेटे के स्कूल चली जाती थी. टिफिन के समय अपने बेटे को मिलने वाले मध्याह्न भोजन से अपना पेट भर लेती थी.’

बुधनी की सौतेली बेटी सुनीता सोरेन ने कहा कि उसने तीन दिन से कुछ नहीं खाया था. उनके पास न आधार कार्ड था, न राशन कार्ड. घर में कुछ खाने के लिए भी नहीं था. भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने वाली संस्था टाईगर फोर्स के धर्मेंद्र यादव, जो सेवाटांड़ के पास स्थित गुमगी गांव में रहते हैं, ने बताया कि बुधनी को इंदिरा आवास आवंटित हुआ था. आवास बना भी है, लेकिन छत का निर्माण नहीं हो पाया. इस मद में किसी ने उसके नाम पर पैसे भी उठा लिये हैं.

मुखिया का क्या कहना है?

थानसिंघडीह पंचायत के मुखिया बालेश्वर राय ने कहा, ‘सूचना मिलने के बाद मैं इसकी जांच करने के लिए गया, लेकिन मुझे बताया गया कि महिला की भूख से मौत हो गयी. यदि पहले मुझे इसकी जानकारी मिल जाती, तो मैं सब कुछ ठीक कर देता. उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से जानकारी होती तो वे उसके लिए व्यवस्था करते.’

अनुमंडल पदाधिकारी ने किया खारिज

दूसरी तरफ, जब अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) रवि शंकर विद्यार्थी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने सारे बयानों को खारिज कर दिया. प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) ने पत्रकारों को बताया कि बुधनी के घर में भोजन था. उसके घर में चावल और आलू मिले हैं. उसका वीडियो भी बनाया गया है. लेकिन, ग्रामीणों ने कहा कि बुधनी की मौत के बाद उसके घर में अनाज रखवाये गये.

जब भी भूख से मौत होती है, शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता : राजकुमार

राजधनवार के विधायक राजकुमार यादव ने ई-न्यूजरूम नामक वेबसाइट से बातचीत में कहा, ‘मैंने विधानसभा में संतोषी कुमारी और बैजनाथ महतो की भूख से मौत का मुद्दा उठाया था. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब भी भूख से मौत होती है, प्रशासन इसे खारिज कर देता है और मौत की वजह कुछ और बता देता है. और ऐसे मामलों में कभी पोस्टमॉर्टम नहीं कराया जाता.’ सूत्रों की मानें, तो बुधनी के शव का भी पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया था.

भूख से मौत के केस में जोड़ेंगे बुधनी सोरेन की मौत का मामला : बलराम

इधर, सामाजिक कार्यकर्ता बलरामजी ने कहा कि उनकी एक टीम गिरिडीह जायेगी और पूरे मामले की जानकारी एकत्र करेगी. उन्होंने कहा कि मीडिया में जो रिपोर्ट आयी है, उसमें कहा गया है कि बुधनी सोरेन के पास राशन कार्ड था, लेकिन उसे आधार कार्ड से लिंक नहीं कराया गया था. इसलिए उसे राशन नहीं मिल रहा था. उन्होंने कहा कि भूख से मौत के मामले मेें जो केस चल रहा है, बुधनी की मौत के मामले को भी उस केस से लिंक करवायेंगे.

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