नदी में चुआं खोद बुझाते हैं प्यास, यही है विकास
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :13 Dec 2017 7:53 AM
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गिरिडीह : शहर से सटे सदर प्रखंड की महेशलुंडी पंचायत स्थित महुआटांड़ गांव के कोल्हरिया टोला जलसंकट से जूझ रहा है. जिला मुख्यालय से लगभग छह किमी की दूरी पर अवस्थित इस आदिवासी बाहुल्य टोला की आबादी लगभग 500 है. यहां बिजली है, गलियां पक्की हैं, लेकिन कमी है तो बस पानी की. गड्ढे में […]
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गिरिडीह : शहर से सटे सदर प्रखंड की महेशलुंडी पंचायत स्थित महुआटांड़ गांव के कोल्हरिया टोला जलसंकट से जूझ रहा है. जिला मुख्यालय से लगभग छह किमी की दूरी पर अवस्थित इस आदिवासी बाहुल्य टोला की आबादी लगभग 500 है. यहां बिजली है, गलियां पक्की हैं, लेकिन कमी है तो बस पानी की. गड्ढे में जमा गंदे पानी से बर्तन धोना पड़ता है और नहाना भी पड़ता है.
वहीं पेयजल के लिए यहां के लोगों को टोले से लगभग 1.25 किमी दूरी पर स्थित खाखो नदी में चुआं खोदना पड़ता है. टोले के दूसरी ओर लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर एक कुआं है, जिसका पानी गर्मी की शुरुआत में ही सूख जाता है. अब भी इस कुआं में पानी है, लेकिन स्थानीय लोग इस पानी को पीने योग्य नहीं मानते हैं.
इस टोले से लगभग तीन-चार सौ मीटर की दूरी पर सीसीएल जलापूर्ति योजना की पाइपलाइन भी गुजरी है. वहीं लगभग एक किमी की दूरी पर बदडीहा पेयजलापूर्ति योजना का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी है. सीसीएल गिरिडीह कोलियरी की ओपेनकास्ट माइंस के ठीक पीछे अवस्थित इस टोला के लोग कोलियरी से उड़नेवाले धूलकण को दिनभर झेलते हैं. माइंस में ब्लास्टिंग होती है तो इसका असर यहां के लोगों के घरों पर भी पड़ता है.
बोरिंग हुई, पर नहीं हो सकी जलापूर्ति नहीं
महेशलुंडी पंचायत का कोल्हरिया टोले के लोग पानी की समस्या से खासे परेशान हैं. यहां की पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए छह बार बोरिंग करायी गयी, लेकिन पानी नहीं निकला. पिछली बार यहां पर डीप बोरिंग भी कराया गया और पानी भी निकला.
इसके बाद पीएचइडी विभाग से बात की गयी. विभाग के अधिकारियों ने अश्वासन दिया कि यहां पर पानी की टंकी बनायी जाएगी और गांव में पाइप के माध्यम से पेयजलापूर्ति की जायेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
वहीं बदडीहा जलापूर्ति योजना का पानी इस गांव में पहुंचे इसके लिए भी विभाग के अधिकारियों से लेकर मंत्री से बात की गयी. स्थानीय लोगों ने बालोडिंगा में स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का घेराव भी किया, जिसके बाद यह अश्वासन दिया गया कि उक्त योजना के तहत टोले में पाइप बिछाया जायेगी,लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इस टोले की जगह दूसरे गांव को योजना का लाभ दे दिया गया. कहा कि वैसे यहां की पानी समस्या को देखते हुए ग्राम सभा में निर्णय लिया जायेगा और योजना तैयार की जायेगी.
हरगौरी साहू, मुखिया, महेशलुंडी पंचायत
यहां की पानी समस्या का निराकरण करने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली. जब बदडीहा पेयजलापूर्ति योजना की शुरूआत हुई तो कोशिश की गयी कि इस टोले तक जलापूर्ति का पाइपलाइन पहुंचे. अधिकारियों से बात की गयी लेकिन इस आदिवासी बाहुल्य टोले की अनदेखी की गयी.
दीनानाथ रजक, वार्ड सदस्य
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