प्रशासन को गुमराह कर रहा केआइटी का एक गुट

Updated at :29 Aug 2017 11:29 AM
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प्रशासन को गुमराह कर रहा केआइटी का एक गुट

गिरिडीह. केआइटी प्रबंधन में वर्चस्व को लेकर विवाद चरम पर, छात्र अभिभावक संशय में राकेश सिन्हा गिरिडीह : खंडोली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी (केआइटी) के प्रबंधन में वर्चस्व को लेकर विवाद चरम पर पहुंच गया है. एक ओर जहां केआइटी मैनेजिंग कमेटी के अध्यक्ष पद से अरविंद कुमार के निलंबन की वैधता को लेकर वर्तमान कमेटी […]

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गिरिडीह. केआइटी प्रबंधन में वर्चस्व को लेकर विवाद चरम पर, छात्र अभिभावक संशय में
राकेश सिन्हा
गिरिडीह : खंडोली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी (केआइटी) के प्रबंधन में वर्चस्व को लेकर विवाद चरम पर पहुंच गया है. एक ओर जहां केआइटी मैनेजिंग कमेटी के अध्यक्ष पद से अरविंद कुमार के निलंबन की वैधता को लेकर वर्तमान कमेटी पर सवाल उठाये जा रहे हैं, वहीं कई तरह की अनियमितताओं पर मामला अदालत तक पहुंच गया है.
इस विवाद के कारण छात्र और उनके अभिभावक भी संशय की स्थिति में है. बता दें कि गत एक दिसंबर 2015 को केआइटी में मारपीट की घटना घटी थी और छात्रों ने प्रबंधन पर दुर्व्यवहार करने के साथ-साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया था.
अंतत: जिला प्रशासन को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और एसडीओ नमिता कुमारी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की गयी. जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद डीसी उमाशंकर सिंह ने केआइटी के तत्कालीन अध्यक्ष अरविंद कुमार मंडल को जांच रिपोर्ट के आलोक में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का आदेश दिया. इसी आदेश के बाद विवाद गहराता चला गया और इस संस्थान के एक गुट द्वारा अधिकारियों को गुमराह कर अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा करने में गुट को सफलता भी मिल गयी.
डीसी के पत्र का किया गया दुरुपयोग : एसडीओ की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीसी श्री सिंह ने केआइटी के तत्कालीन अध्यक्ष अरविंद कुमार मंडल को 8 दिसंबर 2015 को स्पष्टीकरण करते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का आदेश दिया था. जिसपर तत्कालीन अध्यक्ष श्री मंडल ने दस दिसंबर 2015 को अनुपालन प्रतिवेदन समर्पित कर दिया. श्री मंडल के इस पत्र से डीसी संतुष्ट नहीं थे.
उन्होंने पुन: 13 दिसंबर 2015 को केआइटी के अध्यक्ष श्री मंडल के नाम से एक आदेश जारी किया और छह बिंदुओं पर कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया. इस आदेश के आलोक में तत्कालीन अध्यक्ष श्री मंडल ने दो कर्मियों को हटाते हुए अपना अनुपालन प्रतिवेदन 19 दिसंबर 2015 को ही सौंप दिया. लेकिन लगभग पांच माह बाद केआइटी मैनेजिंग कमेटी के ही तत्कालीन सचिव सचिन कुमार सिंह ने चेयरमैन इंचार्ज के रूप में उपायुक्त व एसडीओ को एक पत्र लिखकर दावा किया कि आपके आदेश के आलोक में केआइटी के अध्यक्ष अरविंद कुमार मंडल को निलंबित कर दिया गया है.
इतना ही नहीं, प्रशासनिक अधिकारियों को गुमराह करने के उद्देश्य से उपायुक्त के पत्र का हवाला देते हुए पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ जिले के आला अधिकारियों को भी पत्र भेज दिया गया.
जांच के पूर्व ही हो गयी कार्रवाई : केआइटी के तत्कालीन सचिव सचिन कुमार सिंह के पत्राचार ने न ही कई लोगों को भ्रमित कर दिया है, बल्कि उनके इस कार्यशैली से कई सवाल भी खड़े हो गये हैं.
घटना घटी एक दिसंबर 2015 को, जांच कमेटी बनी दो दिसंबर 2015 को, जांच कमेटी ने डीसी को रिपोर्ट सौंपी सात दिसंबर 2015 को और डीसी ने केआइटी के अध्यक्ष को कार्रवाई का आदेश जारी किया आठ दिसंबर 2015 को. जबकि तत्कालीन सचिव श्री सिंह ने पांच दिसंबर 2015 को ही सीएमसी की बैठक में अध्यक्ष श्री मंडल को निलंबित किये जाने का हवाला देते हुए बैंक को प्रस्ताव की कॉपी सौंपी है और डीसी, एसडीओ समेत अन्य अधिकारियों को भेजे गये पत्र में उपायुक्त के आदेश पर कार्रवाई करने की बात कही है.
गौरतलब बात तो यह है कि पांच दिसंबर 2015 के पूर्व उपायुक्त ने केआइटी प्रबंधन को किसी भी प्रकार का आदेश नहीं दिया था. सूत्रों का कहना है कि सारा खेल बैक डेटिंग का है. प्रशासन का रुख देखते हुए बैक डेटिंग कर बैठक दर्शायी गयी और सारा फर्जी कागजात तैयार किया गया. इतना ही नहीं, बार-बार उपायुक्त के पत्र का हवाला देकर कार्रवाई किये जाने की बात कहकर लोगों को गुमराह भी किया जा रहा है.
मैनेजिंग कमेटी को हटाने का अधिकार नहीं : अरविंद
इधर विवेकानंद एजुकेशनल ट्रस्ट व केआइटी मैनेजिंग कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष अरविंद कुमार मंडल का कहना है कि केआइटी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी के सदस्यों को अध्यक्ष को हटाने का अधिकार नहीं है.
उन्होंने कहा कि केआइटी विवेकानंद एजुकेशनल ट्रस्ट की एक इकाई है.इसलिए ट्रस्ट के गाइडलाइन का अनुपालन केआइटी मैनेजिंग कमेटी को करना होगा. उन्होंने कहा कि विवेकानंद चैरीटेबल ट्रस्ट के बायलॉज में यह स्पष्ट है कि ट्रस्ट का अध्यक्ष ही ट्रस्ट द्वारा संचालित सभी तरह के इकाइयों का अध्यक्ष होगा. इतना ही नहीं, केआइटी के रूल्स एंड रेगुलेशंस के पेज नंबर तीन में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि कोई भी सदस्य ट्रस्ट व संस्थान के खिलाफ कोई गतिविधि करता है तो कमेटी के 50 प्रतिशत से ज्यादा सदस्य निर्णय लेकर कार्रवाई के लिए ट्रस्ट को अनुशंसा कर सकते हैं. श्री मंडल ने कहा कि एक साजिश के तहत उन्हें बैक डेटिंग से कागजात तैयार कर हटाने का दावा किया जा रहा है. उन्होंने इस मामले में प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है.
केआइटी मैनेजिंग कमेटी के वर्तमान सचिव आशुतोष पांडेय का कहना है कि पांच दिसंबर 2015 को कॉलेज मैनेजिंग कमेटी की बैठक हुई थी और इसी बैठक में तत्कालीन अध्यक्ष अरविंद कुमार मंडल को बहुमत से हटाने का निर्णय लिया गया था. उन्होंने कहा कि श्री मंडल पर कई आरोप थे.
छात्र व अभिभावक के साथ मारपीट करने काआरोप के साथ-साथ वित्तीय अनियमितता का मामला भी सामने आया था. तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाकर मामले की जांच की गयी थी और उसकी रिपोर्ट पर श्री मंडल को निलंबित किया गया था.
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