किताबें करती हैं बातें, किताबें कुछ कहना चाहती हैं

Updated at :18 Aug 2017 10:12 AM
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किताबें करती हैं बातें, किताबें कुछ कहना चाहती हैं

गिरिडीह : नारायणी साहित्य अकादमी की ओर से बुधवार की देर शाम पशुपालन विभाग के सभागार में कवि सुरेश वर्मा (कमांडेंट आइटीबीपी) लिखित काव्य संग्रह ‘पतझड़’ का विमोचन किया गया. यहां मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी कविताओं की प्रस्तुति की तो पूरा परिसर तालियाें से गूंज उठा. गोष्ठी की शुरुआत रंगकर्मी महेश अमन […]

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गिरिडीह : नारायणी साहित्य अकादमी की ओर से बुधवार की देर शाम पशुपालन विभाग के सभागार में कवि सुरेश वर्मा (कमांडेंट आइटीबीपी) लिखित काव्य संग्रह ‘पतझड़’ का विमोचन किया गया. यहां मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी कविताओं की प्रस्तुति की तो पूरा परिसर तालियाें से गूंज उठा.
गोष्ठी की शुरुआत रंगकर्मी महेश अमन ने ‘पगली हंस देलकय’ से किया. वहीं सांख्यिकी विभाग के पर्यवेक्षक राजेश पाठक ने ‘सांस भी न ले सको तो क्या कहने’ से खूब वाहवाही बटोरी. सर्वशिक्षा के अरुण शर्मा ने ‘किताबें करती हैं बातें, किताबें कुछ कहना चाहती है’ पंक्तियां सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी. दिव्या शांडिल्य ने कविता पाठ से पूर्व अपने पिता स्वर्गीय रामनूप चौधरी को कविता से श्रद्धांजलि दी. दिव्या ने ‘अधूरे ख्वाब मेरे पापा’ सुनाकर माहौल को गंभीर कर दिया. जैसे ही उन्होंने अगली कविता ‘बीमारी में राजनीति’ सुनायी, सभी हंसते – हंसते लोट-पोट हो गये. संजय करुणेश ने ‘लड़ने से खुद को बचाया करो, उंगली न किसी पर उठाया करो’ पेश की.
परवेज शीतल ने ‘चली है कैसी हवा कैसा ये दौर आया है कि मौसम की तरह आदमी बदलता है’, मोइनउद्दीन शमसी ने ‘इसका पढ़ न उसका पढ़ सास-बहू का झगड़ पढ़’, डॉ पूनम ने ‘जिंदगी तेरे फसाने ने क्या-क्या कर दिया’, उदय शंकर उपाध्याय ने व्यंग्यात्मक कविताओं से समा बांध दिया. ममता बनर्जी ने ‘चलो आज हम लेखनी को जगाएं, पुनः आज हम जगत को दिखायें’ से लोगों को जागृत करने का प्रयास किया.
धन्यवाद ज्ञापन के दौरान श्रीमती बनर्जी ने कहा पशुपालन विभाग के शंकर पांडेय के प्रयास से ही हर माह काव्य गोष्ठी हो पाती है. विमोचन सत्र का संचालन ममता बनर्जी ने किया, जबकि काव्य गोष्ठी का नेतृत्व जिलाध्यक्ष दिव्या शांडिल्य कर रही थीं.
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