मछली पालन व बीज उत्पादन में गिरिडीह होगा स्वावलंबी

Updated at :01 Aug 2017 9:31 AM
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मछली पालन व बीज उत्पादन में गिरिडीह होगा स्वावलंबी

गिरिडीह में बनाये गये हैं स्पॉन उत्पादन के चार हेचरी केंद्र, होगा सालाना चार करोड़ स्पॉन उत्पादित गिरिडीह : मत्स्य पालन के साथ-साथ मछली का स्पॉन (बीज) उत्पादन करने में गिरिडीह जिला अब आत्मनिर्भर बनेगा. इसके लिए मत्स्य विभाग ने कवायद तेज कर दी है. विभाग की मेहनत कुछ ही दिनों में रंग लायेगी. उद्घाटन […]

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गिरिडीह में बनाये गये हैं स्पॉन उत्पादन के चार हेचरी केंद्र, होगा सालाना चार करोड़ स्पॉन उत्पादित
गिरिडीह : मत्स्य पालन के साथ-साथ मछली का स्पॉन (बीज) उत्पादन करने में गिरिडीह जिला अब आत्मनिर्भर बनेगा. इसके लिए मत्स्य विभाग ने कवायद तेज कर दी है. विभाग की मेहनत कुछ ही दिनों में रंग लायेगी. उद्घाटन का इंतजार है. इसके लिए जिला भर में चार हेचरी केंद्र बनाये गये हैं.
चारों हेचरी केंद्र से सालाना एक-एक करोड़ स्पॉन तैयार हो सकेगा. हेचरी चार केंद्रों में खंडोली जलाशय, बेंगाबाद, बक्सीडीह और राजधनवार के केंद्र शामिल हैं. बाद में चारों केंद्रों से तैयार स्पॉन गिरिडीह के अलावा अन्य जिलों को भी भेजे जा सकेंगे. इससे झारखंड को मछली उत्पादन में काफी मदद मिलेगी. खंडोली जलाशय में हेचरी का तैयार है. समिति को इसके उद्घाटन की प्रतीक्षा है. उद्घाटन होते ही यहां मछली का बीज तैयार होना शुरू हो जाएगा.
इस वित्तीय वर्ष में 6300 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य लेकर चले मत्स्य विभाग को खंडोली जलाशय में निर्मित हेचरी केंद्र से एक करोड़ बीज सालाना तैयार मिलेगा. इस तैयार बीज को बाद में अन्य जल संसाधन मसलन तालाब, पोखर, चेकडैम या अन्य स्थलों में डाल कर इससे मछली का उत्पादन किया जायेगा. खंडोली से तैयार स्पॉन (बीज) को अन्य जिलों को निर्यात किया जा सकेगा. लाखों की लागत से तैयार होने वाली यह हेचरी यहां के बेरोजगार युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध करायेगा.
कैसे तैयार होगा स्पॉन : मछली का स्पॉन जलाशय के बगल में तैयार हेचरी में उत्पादन किया जाएगा. इसके लिए वहां एक 35 हजार लीटर का जलमीनार बनाया गया है. इस जलमीनार में जलाशय से पंप के सहारे पानी चढ़ाया जायेगा. जलमीनार से निकलने वाला पानी जमीन से करीब तीन फीट की ऊंचाई पर एक साथ निर्मित चार हेचरी टैंक में भेजा जायेगा. ऊपरी हिस्से से खुले इस चार टैंकों में से पहले टैंक में झरना तैयार किया गया है. इसमें नर और मादा मछली को रखा जायेगा.
मादा मछली उसमें अंडे देगी. उस अंडे को 48 घंटे में ही दूसरे टैंक में भेजा जायेगा. इस टैंक की बनावट ऐसी है कि इसमें पानी कभी स्थिर नहीं रहेगा. इस टैंक से अंडे खुलने के बाद उसे दूसरे टैंक में किया जायेगा. फिर वहां से उसे तैयार बीज का रंग पीला होते ही उसे तीसरे और बाद में चौथे टैंक में किया जायेगा. करीब एक सप्ताह में इसके तैयार बीज को वहां से निकालकर अन्य सुरक्षित स्थानों या तालाब में पहुंचाया जायेगा.
प्रत्येक हेचरी टैंक में तैयार होगा एक से डेढ़ लाख बीज : मत्स्य विभाग गिरिडीह और मत्स्यजीवी सहयोग समिति खंडोली बीच टोला के संयुक्त प्रयास से किये जा रहे इस हेचरी निर्माण में प्रत्येक हेचरी टैंक से करीब एक-डेढ़ लाख मछली का बीज तैयार होगा. इस तरह करीब एक सप्ताह में यहां चार से छह लाख मछली का बीज तैयार हो सकेगा.
करीब तीन किलोग्राम की एक मछली एक बार में डेढ़ लाख अंडे देती है. एक मछली तीन बार अंडे देती है. ऐसे में यह एक सीजन में साढ़े चार लाख अंडे देती है. अंडे देकर वह बहते पानी के विपरीत दिशा की ओर भागती है. इसीलिए हेचरी टैंक को उसी अनुकूल तैयार किया गया है जिसमें पानी स्थिर नहीं रहना है.
स्पॉन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं सदस्य
खंडोली जलाशय में स्पॉन तैयार करने के लिए समिति के तीन सदस्य समिति के सचिव मो तैयब, मो मुस्तकीम और मो समसुद्दीन को मत्स्य विभाग की ओर से रांची के शालीमार में प्रशिक्षित किया गया है. इसके अलावा समिति के अन्य सदस्यों को भी मछली पालन का प्रशिक्षण दिया जा चुका हैं. स्पॉन को भोजन के लिए बेसन का घोल, मुर्गी का अंडा या बार्ली की भी व्यवस्था की गयी है. भोजन को स्लाइन से हेचरी टैंक के नीचे से दिया जाना है ताकि स्पॉन को ऑक्सीजन भी मिलता रहे.
उद्घाटन की प्रतीक्षा में है हेचरी
समिति के सचिव मो तैयब अंसारी बताते हैं कि खंडोली में स्पॉन तैयार करने के लिए हेचरी बनकर तैयार हो गया है. विभाग की ओर से निर्देश मिलते ही इसका उद्घाटन होगा. इस हेचरी से एक सप्ताह में मछली का बीज तैयार हो सकेगा. इसका निर्माण मत्स्यजीवी सहयोग समिति खंडोली बीच टोला कर रही है. भ‌िवष्य में यहां से बड़े पैमाने पर मछली का स्पॉन तैयार किया जायेगा.
गिरिडीह जिला में मछली पालन का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में 6300 टन निर्धारित है. पिछले वित्तीय वर्ष में 4700 टन मछली का उत्पादन किया गया था.
इसे बढ़ाने के लिए अब गिरिडीह में ही स्पॉन तैयार करने की योजना है. प्रत्येक केंद्रों से एक करोड स्पॉन तैयार होगा. गिरिडीह को सलाना 45 करोड स्पॉन की आवश्यकता है. धीरे-धीरे जिला को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा. यहां के लोकल मदर फिश से स्पॉन तैयार होगा. एक सप्ताह में इसका उद्घाटन कर स्पॉन तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा.
रीतू रंजन, जिला मत्स्य पदाधिकारी
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