गिरिडीह : पेट के लिए तैराकी का चैंपियन बना गाइड, कई नेशनल गेम में ले चुका है हिस्सा

Updated at :13 Jun 2017 8:44 PM
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गिरिडीह : पेट के लिए तैराकी का चैंपियन बना गाइड, कई नेशनल गेम में ले चुका है हिस्सा

!!मुन्ना प्रसाद !! गिरिडीह :खंडोली डैम में आयोजित राज्यस्तरीय चैंपियनशिप की 100 मीटर फ्री स्टाइल स्वीमिंग में प्रथम स्थान पानेवाले घनश्याम रजक आजीविका चलाने के लिए गाइड का कार्य करने को विवश है. स्वीमिंग में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में चैंपियन रह चुके घनश्याम रजक आजीविका चलाने के लिए गाइड का कार्य करने को विवश हैं. यह […]

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!!मुन्ना प्रसाद !!

गिरिडीह :खंडोली डैम में आयोजित राज्यस्तरीय चैंपियनशिप की 100 मीटर फ्री स्टाइल स्वीमिंग में प्रथम स्थान पानेवाले घनश्याम रजक आजीविका चलाने के लिए गाइड का कार्य करने को विवश है. स्वीमिंग में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में चैंपियन रह चुके घनश्याम रजक आजीविका चलाने के लिए गाइड का कार्य करने को विवश हैं. यह होनहार खिलाड़ी पलायन कर कोलकाता की एक शिपिंग कंपनी में कार्य कर रहा है. देश के कायकिंग एंड केनोइंग नेशनल गेम में भाग लेने के बाद भी राज्य सरकार से रोजगार मिलने की उम्मीद नहीं जगी, तो दूसरे प्रांत का रुख किया. नेशनल गेम में लगातार भाग लेने के बाद भी राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इस खिलाड़ी के प्रति कोई सकारात्मक पहल नहीं की. घनश्याम वर्ष 2011 में गंगा को स्वच्छ रखने के लिए इलाहाबाद से कोलकाता तक करीब 1680 किलोमीटर तक कायक चलाकर सफर किये थे. बावजूद झारखंड के इस इकलौते खिलाड़ी को राज्य सरकार ने कोई मदद नहीं की.

बेंगाबाद प्रखंड के खंडोली निवासी लक्ष्मी रजक के पुत्र घनश्याम रजक स्नातक हैं. गरीबी और तंगहाली झेल रहे घनश्याम ने प्रभात खबर को बताया कि गिरिडीह कायकिंग एंड केनोइंग एसोसिएशन ने 26 अप्रैल, 2011 को खंडोली डैम में राज्यस्तरीय चैंपियनशिप आयोजित की थी. उसने 100 मीटर फ्री स्टाइल स्वीमिंग में प्रथम स्थान प्राप्त किया था. इस चैंपियनशिप में झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन के सचिव एसएम हाशमी और तत्कालीन उपायुक्त वंदना दाडेल ने उन्हें पुरस्कृत किया था.

इलाहाबाद से कोलकाता तक गंगा में किया सफर
घनश्याम बताते हैं कि कोलकाता की एक टीम द्वारा आयोजित कायक एक्सपेडिशन 2011 में गंगा को स्वच्छ रखने के लिए चलाये गये राष्ट्रीय अभियान के तहत इलाहाबाद से गंगा नदी में कायक चलाकर 1680 किलोमीटर का सफर तय कर कोलकाता पहुंचे. सात लोगों की टीम में पांच सदस्य कोलकाता, एक बिहार और एक झारखंड से था. वह झारखंड से अकेले सदस्य थे. 11 नवंबर से 12 दिसंबर, 2011 तक कुल 32 दिनों का यह सफर टीम ने पूरा कर गंगा का बेहतर तरीके से अध्ययन किया. इसमें कल-कारखानों, शहर के नदी-नालों के कचरे, मृत पशुओं और मनुष्यों के शव जैसे-तैसे बहाकर गंगा को प्रदूषित किये जाने पर एक पुस्तक भी तैयार की थी. इस पुस्तक को केंद्र सरकार को सौंपा गया था. इस जोखिम भरे कार्य में पूरी टीम रात में गंगा के किनारे तंबू लगाकर डेरा जमाती, सुबह छह बजते ही गंगा में उतर जाती. प्रतिदिन करीब 80 से 100 किलोमीटर का सफर तय करते थे. इस कार्य में उन्हें कई भीषण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था. फिर भी हिम्मत नहीं हारी.
कई नेशनल गेम में ले चुके हैं हिस्सा
घनश्याम ने इंडियन कायकिंग एंड केनोइंग एसोसिएशन द्वारा बेंगलुरु में आयोजित 19वें नेशनल कायकिंग एंड केनोइंग चैंपियनशिप, 2008 में भागीदारी निभा चुके हैं. 15 से 19 दिसंबर, 2008 तक हुई इस प्रतियोगिता में उन्होंने अहम भूमिका अदा की थी. इसी एसोसिएशन ने उत्तराखंड के भीमताल में 20वीं नेशनल कायकिंग एंड केनोइंग चैंपियनशिप 2009 आयोजित की थी, जिसमें वह शामिल थे. भोपाल में आयोजित 21वीं नेशनल कायकिंग एंड केनोइंग चैंपियनशिप 2011 में भी उन्होंने झारखंड से भागीदारी निभायी. इसके अलावा 34वें नेशनल गेम 2011 में धनबाद के मैथन में 12-16 फरवरी 2011 को आयोजित कायकिंग प्रतियोगिता में भी उन्होंने अहम भागीदारी निभायी थी. इस दौरान आइओए के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी और तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया था. आज घनश्याम एक शिपिंग कंपनी में रहकर सैलानियों को समुद्र में घुमाने का कार्य कर अपना पेट पाल रहे हैं.
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