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ग्रामीणों को सड़क, स्वास्थ्य सुविधा व पेयजल भी मयस्सर नहीं

Updated at : 13 Apr 2025 8:55 PM (IST)
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ग्रामीणों को सड़क, स्वास्थ्य सुविधा व पेयजल भी मयस्सर नहीं

ग्रामीणों को सड़क, स्वास्थ्य सुविधा व पेयजल भी मयस्सर नहीं

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धुरकी. छत्तीसगढ़ सीमा से सटे धुरकी प्रखंड में कनहर नदी किनारे बसे शुरू गांव में आज भी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. इस गांव में आदिम जनजाति परिवार के करीब 25 घर हैं, जहां लगभग 100 लोग रहते हैं. इस टोले में बिजली तो पहुंच गयी है. पर सड़क, स्वास्थ्य व पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं है. इस टोले के ग्रामीण राशि परहिया, सरवन परहिया, संतोष परहिया, गणेश परहिया, राहुल परहिया, शांति देवी व फुलमतिया देवी ने बताया कि इस बार जहां वे लोग हाथी के उत्पात से परेशान हैं. वहीं अब गर्मी आते ही पानी की बड़ी समस्या हो जाती है. उन लोगों के टोले पर पंचायत मद से एक चापाकल और एक जल मीनार लगा है. लेकिन यह दोनों काफी दिनों से खराब है. मजबूरी में गांव के लोग एक पुराने पक्का कुएं का पानी पीते हैं. यह कुआं भी काफी जर्जर स्थिति में है. वे लोग इसी कूप से पानी पीने के लिए मजबूर है, जिसमें तेज हवा या आंधी से गंदा चला जाता है. इसी पानी को छानकर वे लोग पीते हैँ. ग्रामीणों ने बताया कि चापानल व जल मीनार खराब होने की जानकारी उन लोगों ने स्थानीय प्रतिनिधि को कई बार दी, लेकिन इसकी मरम्मत नहीं करायी गयी. विद्यालय है पर मुकम्मल रास्ता नहीं : गांव में एक प्राथमिक विद्यालय तो है, पर बच्चों को टोले से विद्यालय तक जाने के लिए कोई मुकम्मल रास्ता नहीं है. पगडंडी के रास्ते बच्चे विद्यालय जाते हैं. लोगों ने यह भी बताया कि गांव का आंगनबाड़ी भी मनमाने ढंग से चल रहा है. इसकी निगरानी के लिए कभी कोई अधिकारी नहीं आते हैं. इसलिए वे लोग इसकी शिकायत भी आखिर किससे करें. प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए वाहन नहीं : दूसरी समस्या भी है. गांव से प्रखंड मुख्यालय की दूरी 15 किलोमीटर है. आने-जाने का कोई वाहन उपलब्ध नहीं होने से उन लोगों को आवागमन की समस्या बनी रहती है. खासकर बीमारी की स्थिति में बहुत परेशानी होती है. ग्रामीणों ने बताया कि उनकी आजीविका मजदूरी पर निर्भर है. गांव में काम नहीं मिलने के कारण वे दूसरे गांव में जाकर काम करते हैं. यदि गांव में विकास कार्य होता, उन्हें दूसरे गांव नहीं जाना पड़ता. बच्चे शिक्षा हासिल नहीं कर पा रहे : ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उनके बच्चे इन्हीं सभी असुविधा के कारण आगे शिक्षा हासिल नहीं कर पा रहे हैं. वे मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि उनके इस टोले के किसी विद्यार्थी ने मैट्रिक पास नही किया है. जल्द ठीक हो जायेंगे चापाकल व जलमीनार : मुखिया इस संबंध में पूछे जाने पर खुटिया पंचायत के मुखिया नजारा बीबी ने कहा कि चापानल व जल मीनार खराब होने की सूचना है. उसे सूची में शामिल कर लिया गया है. मरम्मत कार्य होने पर उसे दुरुस्त कर दिया जायेगा. जिन मनरेगा मजदूरों को योजना में काम करने की आवश्यकता है, वे मजदूर आवेदन दें, उन्हें काम उपलब्ध कराया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANJAY

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SANJAY is a contributor at Prabhat Khabar.

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