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तुलसी, नींबू के पौधे लगाकर विद्यालयों ने डकार लिये 60-60 हजार रुपये

Updated at : 05 Oct 2025 8:19 PM (IST)
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तुलसी, नींबू के पौधे लगाकर विद्यालयों ने डकार लिये 60-60 हजार रुपये

अपर समाहर्ता के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने पकड़ी गड़बड़ी

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अपर समाहर्ता के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने पकड़ी गड़बड़ी पीयूष तिवारी, गढ़वा ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में विद्यालय स्तर से ही बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और विद्यालय का वातावरण इको-फ्रेंडली बनाने के उद्देश्य से उपलब्ध करायी गयी 15 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि का गबन कर लिया गया है. जिले के सभी 26 पीएमश्री विद्यालयों को 60-60 हजार रुपये की राशि उपलब्ध करायी गयी थी. इसमें से 10-10 हजार रुपये हर्बल/मेडिकल गार्डेन व 50-50 हजार रुपये एक्टिविटी प्रमोटिंग ग्रीन स्कूल योजना के तहत प्राप्त हुए थे. इस प्रकार सभी विद्यालयों को मिलाकर लगभग 15 लाख रुपये की राशि दी गयी. लेकिन जांच में पाया गया कि सभी विद्यालयों में पौधा लगाने के नाम पर मात्र औपचारिकता निभायी गयी है. यह खुलासा अपर समाहर्ता के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने किया है. इस टीम में जिला शिक्षा अधीक्षक और कोषागार पदाधिकारी (ट्रेजरी ऑफिसर) भी शामिल थे. तीनों पदाधिकारियों ने आठ सितंबर 2025 को पत्रांक 969 के माध्यम से अपनी जांच रिपोर्ट जिले को सौंपी है. क्या है पूरा मामला गढ़वा जिले में कुल 26 पीएमश्री से मान्यता प्राप्त सरकारी विद्यालय हैं. वित्तीय वर्ष 2024-25 में हर्बल/मेडिकल गार्डेन योजना के तहत विद्यालयों को राशि उपलब्ध करायी गयी थी. इस राशि से विद्यालयों में औषधीय, जड़ी-बूटी वाले, फलदार, इमारती और फूलों के पौधे लगाने थे. लेकिन जांच टीम ने पाया कि कई विद्यालयों में एक भी पौधा नहीं लगाया गया. जिन विद्यालयों में पौधे लगाये गये, वहां भी औषधीय पौधों के नाम पर मात्र तुलसी, एलोवेरा और नींबू के 10-20 पौधे लगाये गये. अन्य पौधों में आम, आंवला, पीपल और अमरूद जैसे 20-30 पौधे ही लगाकर सारी राशि खर्च दिखा दी गयी. योजना के तहत पौधों की घेराबंदी भी करनी थी, परंतु जांच में यह पाया गया कि किसी भी विद्यालय में घेराबंदी नहीं की गयी. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी भी विद्यालय में राशि के अनुरूप (60 हजार रुपये) पौधे उपलब्ध नहीं कराये गये. पूरे जिले में पौधों की आपूर्ति की जिम्मेदारी केवल दो एजेंसियों युवा सदन आरोग्य, रांची व गुप्ता ट्रेडर्स, भवनाथपुर (गढ़वा) को दी गयी थी. उल्लेखनीय है कि इस राशि की निकासी वित्तीय वर्ष समाप्त होने के मात्र चार दिन पूर्व, 25 मार्च से 30 मार्च 2025 के बीच की गयी थी. किस विद्यालय में कितने पौधे लगाये गये 1. शालिग्राम मध्य विद्यालय, सोनपुरवा (गढ़वा)- एक भी पौधा नहीं लगाया गया. 2. यूपीजी रोहनियाटांड़, भंडरिया – एक भी पौधा नहीं लगाया गया. 3. यूपीजी उवि डोल, चिनिया – मात्र चार आंवला के पौधे लगाये गये. 4. यूजीपी सोनेहारा, डंडई – तुलसी, पपीता, अंगूर और नींबू के 15 पौधे लगाये गये. 5. यूपीजी उवि खरसोता, मझिआंव – नींबू, आम, अंगूर, अनार के 40 पौधे लगाये गये. 6. यूपीजी अमहर, विशुनपुराृ – तुलसी, नींबू, आम, अशोक, मोरपंखी, अंगूर, पीपल के 80 पौधे. 7. यूपीजी उवि ओबरा, बरडीहा – तुलसी, नींबू, आम, अमरूद, यूकेलिप्टस, अंगूर के 40 पौधे. 8. यूपीजी उवि तेनार, गढ़वा – मात्र 20 पौधे लगाये गये. 9. मध्य विद्यालय, डंडा – आम, अमरूद, अंगूर के 40 पौधे व 20 प्लास्टिक गमले. 10. यूपीजी एमएस खपरो, रंका – मात्र 80 पौधे लगाये गये. 11. मध्य विद्यालय, रक्सी (रमकंडा) – तुलसी, करी पत्ता, नींबू, पपीता, अंगूर, कटहल के 50 पौधे. 12. मध्य विद्यालय, सिलिदाग (रमना) – कुल 60 पौधे लगाये गये. 13. मध्य विद्यालय, संग्रहे (गढ़वा) – तुलसी, करी पत्ता और नींबू सहित 170 पौधे लगाये गये, लेकिन सभी सूख गये. 14. आरके उवि चितविश्राम, नगरउंटारी – नींबू, नीम, शरीफा, आंवला, पीपल, बरगद के 150 पौधे. 15. यूपीजी पीएस खूरा, बड़गड़ – नीम, तुलसी, आंवला, नींबू, कटहल, आम के 20 पौधे व 20 गमले. 16. यूपीजी मवि भूसवा, मझिआंव – 20 पौधे व 10 प्लास्टिक गमले. अन्य विद्यालयों की स्थिति भी कमोबेश यही पायी गयी है. योजना का उद्देश्य एक्टिविटी प्रमोटिंग ग्रीन स्कूल योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरणीय शिक्षा देना और विद्यालयों को हरित एवं स्थायी बनाना था. वहीं “हर्बल मेडिकल गार्डेन योजना” के तहत विद्यालय परिसरों में औषधीय पौधों का बगीचा तैयार करना था, ताकि छात्र पारंपरिक चिकित्सा और जड़ी-बूटियों के महत्व को समझ सकें. लेकिन जांच में यह पाया गया कि उद्देश्य से भटककर योजना की राशि का दुरुपयोग किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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