सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने की मुहिम फिर होगी तेज, गढ़वा उपायुक्त ने दिए सफाई के निर्देश
गढ़वा की सरस्वती नदी की सफाई करती जेसीबी मशीन. फाइल फोटो.
Garhwa News: गढ़वा में सरस्वती नदी के पुनर्जीवन अभियान को फिर तेज किया जाएगा. उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने मानसून से पहले नदी की व्यापक सफाई के निर्देश दिए हैं. नगर परिषद, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर अभियान चलाएंगे. इसका उद्देश्य नदी संरक्षण, भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरण संतुलन को मजबूत बनाना है.
गढ़वा से अविनाश सिंह की रिपोर्ट
Garhwa News: गढ़वा जिले में नदी संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और गिरते भू-जल स्तर की समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने सरस्वती और दानरो नदी के संरक्षण की दिशा में एक बार फिर महत्वपूर्ण कदम उठाया है. मानसून के आगमन से पहले सरस्वती नदी की व्यापक सफाई और पुनर्जीवन अभियान को तेज करने का निर्णय लिया गया है. प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते नदी की सफाई पूरी कर ली जाए तो वर्षा जल का बेहतर संचयन होगा और भू-जल स्तर में भी सुधार आएगा. उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने इस संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक अभियान है.
मेराल से गढ़वा तक चलेगा सफाई अभियान
प्रशासनिक समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि मेराल प्रखंड से लेकर गढ़वा तक बहने वाली सरस्वती नदी के कई हिस्सों में गाद और कचरे की सफाई का कार्य अभी अधूरा है. ऐसे में मानसून शुरू होने से पहले इस कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा करने की योजना बनाई गई है. नगर परिषद गढ़वा के माध्यम से नदी के पूरे प्रवाह क्षेत्र की सफाई कराई जाएगी. विशेष रूप से उन स्थानों पर ध्यान दिया जाएगा जहां जल प्रवाह बाधित हो रहा है या कचरे के कारण नदी की स्वच्छता प्रभावित हो रही है. अधिकारियों का मानना है कि नदी की नियमित सफाई से जलधाराओं का संरक्षण संभव होगा और पर्यावरणीय संतुलन भी बेहतर बनेगा.
‘आपन सरस्तवीया’ अभियान को मिला था व्यापक समर्थन
सरस्वती नदी के पुनरुद्धार का अभियान इसी वर्ष 25 मई को शुरू किया गया था. तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार की पहल पर जनसहयोग से ‘आपन सरस्तवीया’ अभियान चलाया गया था. इस अभियान को स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का व्यापक समर्थन मिला था. नदी की सफाई और संरक्षण के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने श्रमदान किया था. अभियान के शुरुआती चरण में सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले थे. हालांकि बाद में संजय कुमार के स्थानांतरण के बाद यह अभियान धीमा पड़ गया और कई स्थानों पर कार्य अधूरा रह गया.
उपायुक्त ने संभाली अभियान की कमान
अब जिला उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने स्वयं इस अभियान को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली है. उन्होंने वर्तमान अनुमंडल पदाधिकारी कुमार मयंक भूषण को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए सफाई अभियान को फिर से गति देने का निर्देश दिया है. उपायुक्त ने कहा कि मेराल से लेकर उस संगम क्षेत्र तक, जहां सरस्वती नदी दानरो नदी में समाहित होती है, पूरे हिस्से की मुकम्मल सफाई सुनिश्चित की जाए. इसके लिए नगर परिषद और संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर कार्य करने को कहा गया है.
सामाजिक संगठनों और नागरिकों से सहयोग की अपील
प्रशासन इस अभियान को केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहता. उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि पूर्व की तरह इस बार भी सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों का सहयोग लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण का अभियान तभी सफल हो सकता है जब समाज के सभी वर्ग इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं. स्थानीय लोगों की भागीदारी से न केवल सफाई कार्य को गति मिलेगी बल्कि नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी.
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पर्यावरण और भू-जल संरक्षण के लिए जरूरी पहल
उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने कहा कि नदियां किसी भी क्षेत्र की जीवनरेखा होती हैं. यदि नदियां स्वच्छ और अविरल रहेंगी तो पर्यावरण संतुलित रहेगा और भू-जल स्तर में भी सुधार होगा. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. जिला प्रशासन ने प्रबुद्ध नागरिकों और समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे इस जनहितकारी अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें. सरस्वती और दानरो नदी को प्रदूषणमुक्त और स्वच्छ बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास ही स्थायी सफलता का आधार बन सकते हैं.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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