फ्लोराइड समस्या वाले गांव का आरओ प्लांट पांच साल से खराब
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Jun 2024 10:22 PM
फ्लोराइड समस्या वाले गांव का आरओ प्लांट पांच साल से खराब
नगर पंचायत में इन दिनों पानी की गंभीर समस्या हो गयी है. नगर पंचायत क्षेत्र के गांवों में सोलर प्लांट, रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) प्लांट, नलकूप योजना एवं सरकारी चापाकल कई वर्षों से खराब हैं. इधर इस भीषण गर्मी में ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है. उल्लेखनीय है कि इन क्षेत्रों में नल-जल योजना पूरी तरह फेल हो चुकी है. लिहाजा लोगों को पेयजल की लिए काफी मशक्कत करना पड़ रहा है. नगर पंचायत क्षेत्र का अधौरा गांव सूखा क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. फ्लोराइड प्रभावित इस गांव के ग्रामीणों के लिए पानी का जुगाड़ करना बड़ी समस्या है. गांव में करीब 15 चापाकल हैं, पर सभी खराब हैं. इस कारण यहां के लोगों को पानी के लिए दूसरे गांव जाना पड़ रहा है. गत वर्ष इस गांव में नगर पंचायत की ओर से पानी के टैंकर की व्यवस्था की गयी थी. लेकिन इस वर्ष की व्यवस्था नाममात्र की है. सांसद निधि से पांच साल पहले बना आरओ प्लांट 10 दिन चलने के बाद खराब हो गया तथा अभी तक बंद है. ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है. आरओ प्लांट अब गाय का शेड और जुआ का अड्डा बन गया है. यहां गाय बांधी जाती हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें पानी की समस्या को लेकर इस बार कोई सहायता नहीं दी गयी. ग्रामीणों की ओर से नगर पंचायत को इस संबंध में सूचना दी गयी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि सप्ताह में एक या दो टैंकर पूरे वार्ड में भेजा जाता है.
गोशाला बना आरओ प्लांट : अधौरा निवासी विवेक निराला ने कहा कि गढ़वा जिले में फ्लोराइड एक बड़ी समस्या है. अधौरा गांव के पानी में फ्लोराइड बहुत अधिक मात्रा में है. इसको देखते हुए सरकार ने आरओ प्लांट लगाया था. लेकिन इसे लगे हुए पांच साल हो गये, लेकिन 10 जिन चलने के बाद ही यह खराब हो गया, जो आज तक खराब है. हास्यास्पद स्थिति ये है कि अब इसका उपयोग गोशाला के रूप में किया जा रहा है. महिला आशा देवी ने कहा कि इस भीषण गर्मी में उन्हें दूसरे टोला जाकर पानी लाना पड़ता है. गांव की जागो देवी ने कहा कि सरकार ने गांव में कई चापाकल लगा तो दिये हैं, लेकिन इनमें से किसी में पानी नहीं निकलता है. इधर गांव की बहू-बेटियों को दूसरे गांव में जाकर पानी लाना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि उनके गांव में टैंकर से पानी की आपूर्ति होनी चाहिए. इसी तरह से ग्रामीण अरविंद पासवान ने कहा कि नल-जल योजना ठेकेदारों के लिए पैसा कमाने का एक जरिया बना हुआ है. यह योजना खानापूर्ति है. इधर सोलर पैनल लगा कर जलमीनार तो लगा दी गयी है, लेकिन इससे अभी तक जलापूर्ति शुरू नहीं हुई है.आरो प्लांट के विषय में जानकारी नहीं है : कार्यपालक पदाधिकारी
कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने कहा कि आरओ प्लांट के बारे में वे अभी तक अवगत नहीं हैं. अधौरा गांव सूखा क्षेत्र है. जितने भी खराब चापाकल हैं, उनकी मरम्मत करवाई जा रही है. साथ ही कोशिश की जा रही है कि गांव में अधिक से अधिक पानी का टैंकर भेजा जाये.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










