जिंदा बुजुर्ग को कागजों में मार दिया, 7 महीने से पेंशन बंद, सीएम के कड़े रुख और जांच के आदेश के बावजूद भी बेफिक्र सिस्टम
गढ़वा में पेंशन प्रणाली की बड़ी लापरवाही, जिंदा बुजुर्ग को कागजों में मृत घोषित कर पेंशन बंद की गई। केवाईसी के बावजूद 14 महीने से बुजुर्गों को नहीं मिली राशि।
गढ़वा: बड़गड़ प्रखंड के महुआटिकर गांव निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग रतन लकड़ा की केवाईसी न होने और पेंशन अटकने से हुई मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि जिले में पेंशन तंत्र की लापरवाही के कई और हैरान करने वाले मामले सामने आने लगे हैं. रतन लकड़ा की मौत पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कड़े रुख और जांच के आदेश के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई जस की तस बनी हुई है. मंगलवार को उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा द्वारा आयोजित जनसुनवाई में पेंशन बंद होने की जो तस्वीरें सामने आईं, उसने सामाजिक सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रतन लकड़ा की मौत के बाद सामने आया सबसे चौंकाने वाला मामला
रतन लकड़ा की मौत के बाद एक और सबसे चौंकाने वाला सामने आया हैं. मामला गढ़वा के वार्ड नंबर 13 (सहिजना) निवासी दशरथ चंद्रवंशी का है. दशरथ चंद्रवंशी जीवित हैं और न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट नाप रहे हैं, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में उन्हें 'मृत' घोषित कर दिया गया है. इस कागजी लापरवाही के कारण पिछले 7 महीनों से उनकी पेंशन रोक दी गई है, जिससे उनके सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है.
केवाईसी और डीबीटी पूरा, फिर भी 14 महीने से नहीं मिली पेंशन
दूसरा मामला भवनाथपुर प्रखंड के बुका गांव की बुजुर्ग शिवपतिया देवी का है. शिवपतिया देवी का कहना है कि उनके बैंक खाते में केवाईसी प्रक्रिया पूरी तरह अपडेटेड है और खाता डीबीटी व एनपीसीआई से भी लिंक है. इसके बावजूद पिछले 14 महीनों से उन्हें वृद्धावस्था पेंशन की राशि नहीं मिली है. पीड़ित बुजुर्ग ने प्रखंड कार्यालय में दो बार लिखित आवेदन दिया, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई और वे आर्थिक तंगी से जूझने को मजबूर हैं.
ये भी पढ़ें: आवास योजना की राशि लेकर घर न बनाने वाले लाभुकों पर अब गिरेगा गाज, नीलाम पत्र वाद दायर
रतन लकड़ा मामले में रंका एसडीएम व एलडीएम को जांच के आदेश
उल्लेखनीय है कि महुआटिकर गांव में पेंशन न मिलने और इलाज के अभाव में बुजुर्ग रतन लकड़ा की मौत पर ग्रामीणों ने बैंक के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया था. इस खबर का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया 'एक्स' के जरिए गढ़वा डीसी को तुरंत जांच और दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद डीसी पशुपतिनाथ मिश्रा ने रंका एसडीएम और अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) को संयुक्त जांच का जिम्मा सौंपा था .
ये भी पढ़ें: अनाथ बच्चे को 4000 रुपये मासिक सहायता दिलाने का निर्देश, जमीन विवाद में शांति की अपील
सामाजिक योजनाओं का लाभ पाने के लिए बुजुर्गों को चुकानी पड़ रही है भारी कीमत
हालांकि, जनसुनवाई में आए दशरथ चंद्रवंशी और शिवपतिया देवी के मामले यह साबित करने के लिए काफी हैं कि जिले में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पाने के लिए बुजुर्गों को कागजी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक उदासीनता की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










