गढ़वा में ''''यमदूत'''' बने झोलाछाप डॉक्टर

भवनाथपुर में गलत इलाज से एक महीने में दो की मौत, प्रशासन मौन
भवनाथपुर में गलत इलाज से एक महीने में दो की मौत, प्रशासन मौन प्रतिनिधि, गढ़वा/ भवनाथपुर गढ़वा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है और इसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है. जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हैं, जिसका सीधा फायदा अवैध रूप से क्लिनिक चलाने वाले झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं. भवनाथपुर क्षेत्र में बीते एक महीने के भीतर झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज से दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. केस-1 ऑपरेशन के बाद महिला को यूपी में छोड़ भागा डॉक्टर पहली घटना 18 दिसंबर की है. उत्तर प्रदेश की रहने वाली इंदु देवी (मायका मकरी गांव, भवनाथपुर) इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित “शिव शरण सेवा संस्थान” पहुंची थी. इस कथित संस्थान के संचालक धर्मेंद्र मेहता ने बिना उचित व्यवस्था और अनुमति के महिला की बच्चेदानी का ऑपरेशन कर दिया. 19 दिसंबर को महिला की हालत बिगड़ने लगी, तो आरोपी डॉक्टर उसे अपनी निजी गाड़ी से उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज ले गया. वहां महिला की मौत हो जाने के बाद डॉक्टर शव को छोड़कर फरार हो गया. केस-2 मेडिकल स्टोर संचालक के इलाज से मासूम की मौत पहले मामले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि 20 जनवरी 2026 को एक और दर्दनाक घटना सामने आयी. भवनाथपुर में यादव मेडिकल स्टोर के संचालक विंध्याचल यादव के गलत इलाज से आठ वर्षीय बालक कुंदन कुमार की मौत हो गयी. मृतक बालक भी उत्तर प्रदेश का निवासी था. बताया जा रहा है कि बिना डॉक्टर की योग्यता के ही उसका इलाज किया जा रहा था. व्यवस्था के बाद भी मरीजों को किया जाता है रेफर, ड्यूटी से गायब रहते हैं चिकित्सक जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का अंदाजा इन घटनाओं से आसानी से लगाया जा सकता है. 14 जनवरी को सदर अस्पताल में एक कोरवा जनजाति की गर्भवती महिला शाम पांच बजे से रात दस बजे तक दर्द से कराहती रही, लेकिन कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था. पहले उसे रेफर करने की तैयारी की गयी, लेकिन दबाव बढ़ने पर अंततः सुरक्षित प्रसव कराया गया. वहीं 18 जनवरी को अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने दोपहर दो बजे सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, तो कई डॉक्टर अपनी ड्यूटी से नदारद पाये गये. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकारी अस्पतालों में समय पर डॉक्टर नहीं मिलते और मरीजों को रेफर कर दिया जाता है, तो मजबूरी में लोग झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाते हैं. सीएचसी के पास ही अवैध क्लिनिक और ऑपरेशन थिएटर का संचालन होना स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत और घोर लापरवाही की ओर इशारा करता है. लोगों का मानना है कि जब तक सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त नहीं होंगी, तब तक झोलाछाप डॉक्टरों का यह जानलेवा खेल चलता रहेगा.
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