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जीरामजी नामकरण का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को स्थायी बनाना : सांसद

मनरेगा का नाम बदलने पर सांसद वीडी राम ने दी सफाई, विपक्ष पर साधा निशाना

मनरेगा का नाम बदलने पर सांसद वीडी राम ने दी सफाई, विपक्ष पर साधा निशाना

– सांसद ने कहा- मनरेगा में सबसे अधिक खर्च मोदी सरकार के कार्यकाल में हुआ

प्रतिनिधि, गढ़वा

पलामू सांसद वीडी राम ने शुक्रवार को मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी व रोजगार आजीविका मिशन (वीभी जीरामजी) रखने को लेकर उठे सवालों पर अपनी सफाई दी. गढ़वा परिसदन में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि योजना के नाम परिवर्तन का उद्देश्य इसे सरकार के विकसित भारत विजन से जोड़ते हुए अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है. सांसद ने कहा कि सरकार के अनुसार इस योजना के तहत अब काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गयी है. साथ ही मजदूरों को भुगतान साप्ताहिक रूप से किया जायेगा, जिससे उन्हें समय पर मजदूरी मिल सके. उन्होंने बताया कि विकसित भारत के लक्ष्य के तहत इस योजना को वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के विजन से जोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि यह योजना अब केवल रोजगार गारंटी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण आजीविका को स्थायी बनाने और विकास का सशक्त माध्यम बनेगी. पहले मनरेगा को केवल मिट्टी कटाई और गड्ढा भराई तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब इसके तहत स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जायेगा. सांसद ने कहा कि डिजिटल भुगतान, जियो-टैगिंग और आधार आधारित प्रणाली को शामिल करने से योजना में व्यापक पारदर्शिता आयेगी. उन्होंने दावा किया कि मनरेगा पर सबसे अधिक खर्च प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हुआ है. अब तक इस योजना पर कुल 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं, जिनमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये मोदी सरकार के कार्यकाल में खर्च हुए हैं. इस अवसर पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रघुराज पांडेय, ठाकुर महतो, वरिष्ठ नेता अलखनाथ पांडेय, प्रमोद चौबे, ओमप्रकाश तिवारी, अंजनी तिवारी, हरेंद्र द्विवेदी, उमेश कश्यप, शिवनारायण चंद्रा, प्रवीण जायसवाल आदि मौजूद थे.

योजना का नाम बदलना नयी बात नहीं

विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए सांसद ने कहा कि योजना का नाम बदलना कोई नयी बात नहीं है. उन्होंने बताया कि वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी सरकार ने विभिन्न योजनाओं को मिलाकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम बनाया था. इसके बाद राजीव गांधी सरकार ने इसका नाम जवाहर रोजगार योजना रखा. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल में इसका नाम पहले नरेगा और फिर मनरेगा किया गया. उन्होंने कहा कि समय, परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार अब इसका नाम वीभी जीरामजी रखा गया है.

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