पलामू की ””””बौद्धिक पहचान”””” थे प्रो सुभाष चंद्र मिश्रा

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पलामू की ””””बौद्धिक पहचान”””” थे प्रो सुभाष चंद्र मिश्रा

पलामू की ”बौद्धिक पहचान” थे प्रो सुभाष चंद्र मिश्रा

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प्रतिनिधि, गढ़वा

पलामू प्रमंडल के प्रख्यात शिक्षाविद और मेदिनीनगर के जीएलए कॉलेज के प्रोफेसर सुभाष चंद्र मिश्रा के निधन से गढ़वा सहित पूरे पलामू प्रमंडल में शोक की लहर है. शिक्षा जगत में उनके निधन को एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है. वे केवल एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व और मार्गदर्शक के रूप में जाने जाते थे. एकीकृत पलामू के दौर से ही प्रो मिश्रा का गढ़वा से गहरा जुड़ाव रहा. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक कार्य करते हुए हजारों छात्रों को दिशा दी. उनके अनेक शिष्य आज देश और विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर पलामू प्रमंडल का नाम रोशन कर रहे हैं. पलामू के शिक्षक व साहित्यकार परशुराम तिवारी द्वारा रचित पुस्तक सबकी आस सुभाष में प्रो मिश्रा के व्यक्तित्व और उनके जीवन से जुड़े कई संस्मरणों का उल्लेख किया गया है. इस पुस्तक में इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ कुमार वीरेंद्र का एक संस्मरण भी शामिल है. उन्होंने लिखा है कि एक बार गढ़वा के एक हाई स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वे विवादों में घिर गये थे. उस समय प्रो सुभाष चंद्र मिश्रा ने उन्हें फोन कर उनके लेख की सराहना की और उनका मनोबल बढ़ाया. यह उनकी खासियत थी कि वे हमेशा उभरते हुए विद्वानों और लेखकों का उत्साह बढ़ाते थे.

संयोग से “सबकी आस सुभाष” पुस्तक के लोकार्पण समारोह में गढ़वा के तत्कालीन एसडीएम संजय कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे. 19 दिसंबर 2025 को मेदिनीनगर के सदर प्रखंड स्थित बड़कागांव विद्यालय परिसर में आयोजित इस समारोह में खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. उस अवसर पर एसडीएम संजय कुमार ने कहा था कि यहां उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि कोई व्यक्ति यूं ही “संपूर्ण व्यक्तित्व” की ओर नहीं बढ़ता. इस समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने प्रोफेसर मिश्रा को ””””चुंबकीय व प्रेरक व्यक्तित्व”””” का स्वामी बताया था.उन्होंने उनके शैक्षणिक और सामाजिक योगदान की सराहना करते हुए उन्हें समाज का सच्चा पथ-प्रदर्शक करार दिया था. इस पुस्तक में 64 लेखकों की रचनाएं संग्रहित हैं, जो प्रोफेसर मिश्रा के प्रति समाज के हर वर्ग के सम्मान और जुड़ाव को दर्शाती हैं.

जिले के जनप्रतिनिधियों ने व्यक्त की शोक संवेदना

प्रोफेसर सुभाष चंद्र मिश्रा के निधन की खबर अत्यंत पीड़ादायक है. शिक्षा के क्षेत्र में उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा. उनके जाने से समाज और शिक्षा जगत को जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है.

– मिथिलेश ठाकुर, पूर्व मंत्री

प्रख्यात शिक्षाविद प्रो सुभाष चंद्र मिश्रा का निधन पूरे प्रमंडल के लिए शिक्षा जगत के एक युग का अंत है. वे सादगी और प्रकांड विद्वता के प्रतिमूर्ति थे, जिन्होंने हजारों युवाओं का भविष्य संवारा. उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति के समान है.

– भानु प्रताप शाही, पूर्व मंत्री

प्रोफेसर साहब हमारे लिए केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक कुशल मार्गदर्शक और अभिभावक के समान थे. छात्र जीवन के दौरान उनसे जो कुछ सीखने को मिला, वह आज भी मेरे सामाजिक जीवन की असली पूंजी है. पलामू प्रमंडल ने आज एक सच्चा रत्न खो दिया है.

– सत्येंद्र नाथ तिवारी, विधायक गढ़वा

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

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