स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे संवेदनशील चेहरा होती हैं नर्स: एसडीएम

स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे संवेदनशील चेहरा होती हैं नर्स: एसडीएम
प्रतिनिधि, गढ़वा प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म करने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार के कॉफी विद एसडीएम कार्यक्रम में नर्सों को आमंत्रित किया गया था. अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिले के विभिन्न अस्पतालों से 30 से अधिक महिला नर्सिंग कर्मियों ने एसडीएम के साथ कॉफी की चुस्कियों के बीच अपनी चुनौतियां साझा कीं और स्वास्थ्य सेवाओं को और मानवीय बनाने का संकल्प लिया. संवाद की शुरुआत करते हुए एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे कोमल और संवेदनशील चेहरा ””””नर्स”””” होती हैं. उन्होंने नर्सों को प्रेरित करते हुए कहा कि रोगियों की सेवा करना किसी ईश्वरीय कार्य से कम नहीं है. उन्होंने अपील की कि जब एक मरीज अस्पताल आता है, तो वह सबसे पहले आपकी मुस्कुराहट और व्यवहार से ठीक होता है. सेवा की इस पवित्र भावना पर कभी भी निजी लाभ या लालच को हावी न होने दें. उन्होंने कहा कि प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच सीधे संवाद से व्यवस्था की कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी. कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रीति कुमारी, चंदा भारती, श्वेता कुमारी, अंजू कुमारी, सबीना खातून, सपना कुमारी, सुप्रिया, शालिनी, निकिता प्रिया, प्रियंका, सीमांचली, अर्चना, स्नेहा, अरविंद कुमार, दीपक यादव, जमील अख्तर सहित कई नर्सिंग कर्मी उपस्थित थे. अगर चाहो, मैं इसे अखबार के फ्रंटपेज के लिए और आकर्षक, हेडलाइन और बुलेट पॉइंट्स के साथ तैयार कर दूँ ताकि मुख्य संदेश और भी आसानी से समझ आए.
कार्यस्थल की चुनौतियों पर बेबाक चर्चाकार्यक्रम में 90 प्रतिशत से अधिक महिला नर्सों ने भाग लिया. संवाद के दौरान उन्होंने फील्ड और अस्पतालों में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को बेबाकी से रखा. नर्सिंग कर्मियों ने रात्रि ड्यूटी के दौरान सुरक्षा, अस्पतालों में बुनियादी संसाधनों की कमी, साफ-सफाई और मरीजों के परिजनों के साथ तालमेल जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी. एसडीएम ने सभी सुझावों को गंभीरता से नोट किया और आश्वस्त किया कि वे इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित उच्चाधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग से पत्राचार करेंगे. सदर अस्पताल की सीनियर नर्सों ने जूनियर साथियों को सिखाया कि कैसे बिना किसी अटेंडेंट वाले मरीजों की देखभाल करनी चाहिए. संध्या तिवारी, नीतू कुमारी और रंजू बाला मिंज जैसी वरिष्ठ नर्सों ने जूनियर टीम को मरीजों के प्रति सहानुभूति रखने और हमेशा हंसमुख रहकर सेवा करने का मंत्र दिया.
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