चार दशक से प्रसिद्ध है गढ़वा शहर के रामदास का तिलकुट जितेंद्र सिंह, गढ़वा मकर संक्रांति का त्योहार करीब आते ही गढ़वा जिले से लेकर सभी प्रखंड मुख्यालयों तक तिलकुट का बाजार पूरी तरह से सज चुका है. चौक-चौराहों पर तिलकुट की सौंधी खुशबू से पूरा इलाका महक उठा है. शहर के कई इलाकों में बाहर से आये कारीगरों द्वारा मौके पर ही तिलकुट बनाया जा रहा है, जिससे बाजार में रौनक और भी बढ़ गयी है. मकर संक्रांति के दिन तिलकुट, गुड़ और चीनी के तिलकुट की बढ़ती मांग को देखते हुए कई दुकानदारों ने बिहार के गयाजी, औरंगाबाद और वाराणसी से कारीगरों को बुलाया है, जो दिन-रात मेहनत कर ताजे और स्वादिष्ट तिलकुट तैयार कर रहे हैं. कारीगरों के अनुसार तिलकुट बनाने की प्रक्रिया काफी मेहनत-तलब और समय लेने वाली होती है, लेकिन सर्दी के मौसम में इसकी मांग सबसे अधिक रहती है. बाजार में कानपुर का तिल भी खासा मांग में है, जिसे राज्य के बाहर भी भेजा जाता है. शहर के मेनरोड स्थित रामदास तिलकुट भंडारा पिछले चार दशकों से अपनी अलग और अमिट पहचान कायम किये हुए है. इसके मालिक राजू प्रसाद और उनके पुत्र राहित ने बताया कि चीनी, गुड़ और खोवा से बने तिलकुट की कीमतों में फर्क है, जिनमें सबसे ज्यादा मांग खोवा वाले तिलकुट की है. राजू प्रसाद ने बताया कि उनका तिलकुट न सिर्फ राज्य बल्कि विदेशों में भी भेजा जाता है. उन्होंने कहा कि हमारा तिलकुट पूर्व में अमेरिका तक गया है, और इस बार लंदन और दुबई में भी हमारा खोवा तिलकुट भेजा गया है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति नजदीक आते ही तिलकुट बनाने का काम भी तेज कर दिया गया है. इस वर्ष, तिलकुट बनाने के लिए बनारस, गयाजी और औरंगाबाद से छह कारीगर आये हैं, जो ताजे तिलकुट तैयार कर रहे हैं. जिले में करोंड़ों का कारोबार मकर संक्रांति के कारण बाजारों में काफी गहमागहमी देखी जा रही है. लोग चूड़ा, गुड़, तिलकुट और तिल से बनी अन्य मिठाइयों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं. इसके अलावा, दही और दूध की अग्रिम बुकिंग भी हो रही है, क्योंकि वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन चूड़ा-दही खाने की रस्म निभायी जाती है. एक अनुमान के अनुसार मकर संक्रांति पर उपयोग होने वाली खाद्य सामग्रियों का बाजार करोड़ों रुपये का होता है. पंचांग के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त 15 जनवरी को है. मान्यता है कि इस दिन सूर्य उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे स्नान, दान और पुण्य का विशेष महत्व होता है. मकर संक्रांति के बाद मांगलिक कार्यों की भी शुरुआत हो जाती है. हालांकि, 14 जनवरी को भी मकर संक्रांति मनाने का प्रचलन वर्षों से है. तिलकुट, चूड़ा और दही की कीमतों में बढ़ोतरी मकर संक्रांति को लेकर तिलकुट, चूड़ा, दूध और दही की कीमतों बढ़ोतरी हुई है, जिससे लोग अपनी क्षमता और जरूरत के अनुसार ही खरीदारी कर रहे हैं. फिर भी त्योहार के जश्न में बाजारों में उत्साह और चहल-पहल बनी हुई है, जो इस दिन के खास महत्व को दर्शाता है. गढ़वा में तिलकुट और चूड़ा की कीमत खोवा का तिलकुट : 480 रुपये प्रति किलो चीनी का तिलकुट : 340 रुपये प्रति किलो गुड़ का तिलकुट : 360 रुपये प्रति किलो तिल लड्डू : 240 रुपये प्रति किलो चुड़ा का लाई : 120-140 रुपये प्रति किलो मुरही का लाई : 100 रुपये प्रति किलो चूड़ा : 50 – 80 रुपये प्रति किलो
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