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झोलाछाप डॉक्टर के कथित गलत इलाज से युवक की हालत गंभीर

गाल की मामूली फुंसी बना जानलेवा जख्म, परिवार आर्थिक संकट में

गाल की मामूली फुंसी बना जानलेवा जख्म, परिवार आर्थिक संकट में प्रतिनिधि, डंडई प्रखंड के रारो गांव अंतर्गत बाघीझरिया टोला में लवाहीकलां गांव के एक कथित झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज से 35 वर्षीय उमेश भुइयां की हालत गंभीर हो गयी है. समय पर सही इलाज नहीं मिलने के कारण वह इस समय जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है. परिजनों के अनुसार उमेश भुइयां बाहर रहकर मजदूरी करता था. करीब दो माह पूर्व काम के दौरान उसके गाल में एक छोटी सी फुंसी हो गयी थी, जिससे हल्की सूजन आ गयी. इलाज के लिए वह घर लौटा, लेकिन किसी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र जाने के बजाय गांव के लोगों की सलाह पर वह लवाहीकलां गांव के कथित डॉक्टर राजेंद्र रजक के पास चला गया. आरोप है कि बिना किसी जांच के फुंसी को सामान्य सूजन बताकर पकने देने की सलाह दी गयी. बाद में फुंसी को चीरकर मवाद निकाला गया, वहां बाती लगायी गयी और लगातार इंजेक्शन दिये जाने लगे. कई दिनों तक इलाज के बावजूद जख्म बढ़ता गया और पीड़ा असहनीय हो गयी. वर्तमान में उमेश के गाल का जख्म अत्यंत गंभीर हो चुका है. कथित डॉक्टर राजेंद्र रजक ने स्वीकार किया है कि मरीज को आठ दिनों तक सुबह-शाम कुल 16 डेक्सोना इंजेक्शन लगाये गये. जांच कर की जायेगी कार्रवाईः सिविल सर्जन सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ केनेडी ने स्पष्ट कहा कि संबंधित व्यक्ति डॉक्टर नहीं है और उसे इलाज का कोई अधिकार नहीं था. मरीज को तुरंत डंडई अस्पताल या गढ़वा सदर अस्पताल रेफर किया जाना चाहिए था. झोलाछाप द्वारा इस तरह का इलाज नियमों के विरुद्ध है और मरीज की जान से खिलवाड़ है. मामले की जांच कर दोषी पाये जाने पर कार्रवाई की जायेगी.

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