गढ़वा जिला बने 34 साल, अब भी अधूरी हृदय रोग उपचार की सुविधा

ह्रदय रोगी बेहतर उपचार बाहर जाने को मजबूर, विशेषज्ञ चिकिस्क व आधुनिक उपकरणों का अभाव
विश्व ह्रदय दिवस आज ह्रदय रोगी बेहतर उपचार बाहर जाने को मजबूर, विशेषज्ञ चिकिस्क व आधुनिक उपकरणों का अभाव जितेंद्र सिंह,गढ़वा 1 अप्रैल 1991 को गढ़वा को जिला का दर्जा मिलने के साथ ही यहां के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब क्षेत्र का समुचित विकास होगा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी. विशेषकर हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज को लेकर लोगों ने बड़ी आशाएं पाली थीं. लेकिन 34 वर्षों बाद भी जिले में हृदय रोगियों के लिए समुचित उपचार उपलब्ध नहीं हो सका है. हालांकि इस अवधि में कई अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र खुले, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और आधुनिक उपकरणों का अभाव अब भी बरकरार है. हृदय रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रांची, पटना, वाराणसी या दिल्ली जैसे बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है. यह स्थिति गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि बाहर इलाज कराने में उन्हें भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है. करीब तीन वर्ष पूर्व जिले के ही प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ पंकज प्रभात ने गढ़वा में उपचार की पहल की थी. कई मरीजों को राहत भी मिली, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर और स्टेंट लगाने जैसी सुविधाएं शुरू नहीं हो पायीं. विश्व हृदय दिवस के अवसर पर यह सवाल फिर उठता है कि आखिर जिला बनने के 34 साल बाद भी गढ़वा के लोगों को हृदय रोगों के लिए आधुनिक सुविधा क्यों नहीं मिल पायी. बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब सरकार और स्वास्थ्य विभाग को ठोस कदम उठाकर गढ़वा में अत्याधुनिक हृदय रोग उपचार केंद्र की स्थापना करनी चाहिए.
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