प्रसव सुविधा होने के बावजूद महिला को किया रेफर, दबाव बनाने पर हुई सुरक्षित डिलीवरी प्रतिनिधि, गढ़वा सरकार संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन गढ़वा सदर अस्पताल में संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा अपेक्षित रुचि नहीं दिखाने के मामले सामने आ रहे हैं. ताजा मामला गढ़वा जिले के एक आदिम जनजाति परिवार से जुड़ा है, जिसने सदर अस्पताल की रेफर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. गढ़वा जिला के चिनियां प्रखंड के राजबस गांव निवासी जितेंद्र कोरवा की पत्नी मंजू कुमारी बीते 14 जनवरी को प्रसव पीड़ा होने पर गढ़वा सदर अस्पताल पहुंची. परिजनों के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने यह कहकर महिला को मेदिनीनगर रेफर कर दिया कि गर्भ में बच्चा गंदा पानी पी चुका है और यहां प्रसव कराना संभव नहीं है. रात के समय रेफर किये जाने से पीड़ित परिवार की परेशानी और भी बढ़ गयी. मंजू कुमारी के पति जितेंद्र ने बताया कि वह अत्यंत गरीब हैं और बाहर इलाज कराने में असमर्थ हैं. उन्होंने अस्पताल में ही रुककर इलाज कराने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद रेफर की प्रक्रिया की गयी. बाद में जब इस पूरे मामले की जानकारी गढ़वा चैंबर अध्यक्ष बबलू पटवा को हुई, तो उन्होंने अस्पताल उपाधीक्षक से संपर्क कर मामले की गंभीरता बताते हुए गरीब आदिम जनजाति महिला के इलाज की मांग की. चैंबर अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया. उपाधीक्षक द्वारा इलाज का आश्वासन दिये जाने के बाद महिला का सदर अस्पताल में ही उपचार शुरू किया गया, जिसके बाद मंजू कुमारी ने सुरक्षित रूप से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सदर अस्पताल में ही सफल प्रसव संभव था, तो पहले रेफर क्यों किया गया. हर महीन औसतन 50 मरीज किये जा रहे रेफर जानकारी के अनुसार गढ़वा सदर अस्पताल से औसतन प्रतिमाह 50 से अधिक मरीज रेफर किये जा रहे हैं. पिछले दो महीनों में ही 110 से अधिक मरीजों को बाहर रेफर किया गया है. ऐसे में यह आशंका गहराने लगी है कि जिन मरीजों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव है, उन्हें भी अनावश्यक रूप से रेफर किया जा रहा है. दावे पर सवाल स्वास्थ्य विभाग लगातार यह दावा करता रहा है कि गढ़वा सदर अस्पताल की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, लेकिन इस तरह की घटनाएं विभागीय दावों की हकीकत पर सवालिया निशान खड़ा कर रही हैं. क्या कहते हैं सिविल सर्जन इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ जान एफ केनेडी ने कहा कि सदर अस्पताल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है. जितेंद्र कोरवा की शिकायत मिलते ही तत्काल हस्तक्षेप कर इलाज सुनिश्चित कराया गया है. आगे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सक्रियता के साथ आवश्यक कदम उठाये जायेंगे. चिकित्सकों ने दी सफाई परिजनों का आरोप है कि जब वह अस्पताल पहुंचे तो उस समय डॉ माया पांडेय ड्यूटी पर तैनात थी. वहीं डॉ माया ने इस संबंध में कहा कि अस्पताल में पूरी सक्रियता के काम हो रहा है. काई बार परिजन अनावश्य दबाव बनाते हैं, फिर भी हम धैर्य के साथ काम करते हैं. उन्होंने बताया कि 14 जनवरी की रात डॉ प्रतिमा तैनात थीं और उन्होंने मरीज की स्थिति को देखकर बाहर ले जाने को कहा था. हलांकि मरीज के परिजन व चैंबर अध्यभ ने सिविल सर्जन और अस्पताल उपाधीक्षक से बात की, जिसके बाद अस्पताल में महिला का इलाज शुरू हुआ. वहीं डॉ प्रतिमा ने कहा कि मामला ऑपरेशन का था और उस समय अस्पताल में सर्जन नहीं थे. कुछ देर बात सर्जन अस्पताल आये जिसके बाद महिला का ऑपरेशन हुआ.
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