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डिजिटल इंडिया के युग में भी नेटवर्क सुविधा से वंचित है झारखंड का ये इलाका, जानें क्या है इसकी वजह

गढ़वा जिले के भंडरिया और बड़गड़ प्रखंड लोगआज भी नेटवर्क सुविधा से वंचित हैं. इस वजह से कोई भी सरकारी काम कराने के लिए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
जर्जर पड़ा ट्रांसफार्मर
जर्जर पड़ा ट्रांसफार्मर
प्रभात खबर

संतोष वर्मा/मुकेश तिवारी

गढ़वा: डिजिटल इंडिया के इस युग में एक तरफ जहां तेजी से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास हो रहा है तो दूसरी तरफ गढ़वा जिले के नक्सल प्रभावित भंडरिया और बड़गड़ प्रखंड की 30 फीसदी गांवों की करीब 10 हजार आबादी नेटवर्क सुविधा से वंचित है. आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक यहां के लोगों के लिए डिजिटल इंडिया का सपना अधूरा है.

जबकी पूरी दुनिया डिजिटलाइजेशन के दौर में तेजी से आगे बढ़ रही है. ऐसे में यहां के लोगों को नेटवर्क सुविधा से वंचित होने के कारण परंपरागत जीवन शैली के सहारे जीविकोपार्जन करना पड़ रहा है. लेकिन इन दोनों प्रखंडो की 70 फीसदी ग्रामीण आबादी को नेटवर्क सुविधा का लाभ मिल रहा है.

जानकारी के अनुसार जिले के भंडरिया और बड़गड़ प्रखंड की अरार, भजना, चपलसी, चपिया, चेमो, सनेया, हरता, हेसातु, जोन्हीखांड़, खुरा, कोरवाडीह, कुल्ही, कुटकु, लिधकी, मंजरी, पोलपोल, संगाली, सरूअत, सिंजो, तेवाली, तुमेरा व तुरेर गांव में नेटवर्क सुविधा उपलब्ध नही है. 2011 की जनसंख्या के अनुसार इन गांवों की आबादी करीब 10 हजार है. वहीं साक्षरता दर की बात करें तो वो करीब 50 फीसदी है

बैंकिंग कार्यों के लिए दर्जनों किमी तय करते हैं दूरी

नक्सलियों की चपेट में रहने वाले इन गांवों तक नेटवर्क सुविधा नहीं होने से उन्हें एक दूसरे से बात करने के लिए बड़ी परेशानी होती है. तत्काल सूचनाओं का आदान प्रदान नहीं होने से उन्हें अपने कार्यों के लिए कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीण बताते हैं नेटवर्क सुविधा का अभाव होने के कारण गांव के समीप प्रज्ञा केंद्र भी संचालित नहीं हो पाता है.

ऐसे में इन गांवों के लोगों को किसी भी प्रकार की सरकारी काम के लिये उन्हें दिनभर का समय निकालकर भंडरिया और बड़गड़ प्रखंड मुख्यालय पहुंचना पड़ता है. लेकिन आवागमन की सुविधा न होने की वजह से काफी परेशानी उठानी पड़ती है. आलम ये है कि गांव के किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होती है तो तत्काल एम्बुलेंस की मदद के लिए फोन तक नहीं कर पाते हैं, फिर जैसे तैसे उन्हें डोली-खटोली के सहारे इलाज के लिये ले जाना पड़ता है.

नक्सली खौफ के बीच दिये की रोशनी से गुजरती है रातें

तुरेर, तुमेरा, खपरीमहुआ, पोलपोल, खुरा, कोरवाडीह, हेसातु, कुल्ही, चेमो, सनेया, लिधकि समेत कई गांव ऐसे हैं कि जो कि नक्सल प्रभावित इलाका है. इनका खौफ इतना ज्यादा है कि गांव में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची है

आज से करीब तीन-चार साल पहले लोहे के खंभे के सहारे यहां बिजली पहुंचाने की कवायद शुरू की हुई थी, लेकिन काम न होने के कारण आज खंभे व तार जहां तहां बिखरे पड़े हैं. गांव में लगा ट्रांसफार्मर बेकार पड़ा है. स्कूलों का संचालन भी ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है . हलांकि भंडरिया, बड़गड़ की कुछ गांवों तक आवागमन की सुविधा बेहतर हुई है. वहीं अन्य कई सड़कों के निर्माण की स्वीकृति मिली है.

इन क्षेत्रों में नेटवर्क लग रहा है: सांसद

इस संबंध में पूछे जाने पर पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने कहा की भंडरिया और बड़गड़ की इन क्षेत्रों में नेटवर्क लगाया जा रहा है. एयरटेल को काम मिला है. इसके अलावे इन क्षेत्रों की दर्जनभर सड़कों की निर्माण की स्वीकृति केंद्र सरकार ने दी है.

Posted by: Sameer Oraon

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