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आजादी के पूर्व से हो रही है गढ़वा के बांकी नदी में छठ पूजा, जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

Updated at : 09 Nov 2021 2:05 PM (IST)
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आजादी के पूर्व से हो रही है गढ़वा के बांकी नदी में छठ पूजा, जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

अनुमंडल मुख्यालय में बांकी नदी तट पर स्थित अति प्राचीन सूर्य मंदिर छठ व्रतधारियों के लिये आस्था व विश्वास का केंद्र है़ इस सूर्य मंदिर की स्थापना नगरगढ़ के भैया राज किशोर देव की धर्मपत्नी सीता देवी ने सन1943 में करायी थी.

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गढ़वा : अनुमंडल मुख्यालय में बांकी नदी तट पर स्थित अति प्राचीन सूर्य मंदिर छठ व्रतधारियों के लिये आस्था व विश्वास का केंद्र है़ इस सूर्य मंदिर की स्थापना नगरगढ़ के भैया राज किशोर देव की धर्मपत्नी सीता देवी ने सन1943 में करायी थी.

तब से यहां छठ व्रत होता है़ यहां सीमावर्ती उतर प्रदेश व मध्यप्रदेश सहित बिहार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से भी छठ व्रती आते है़ं यह सूर्य मंदिर अष्टकोणीय मंदिर है़ मंदिर के चार कोणों पर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित है. बीच में भगवान सूर्य की मूर्ति स्थापित है़

अति प्राचीन मंदिर होने के कारण मंदिर जीर्ण शीर्ण हो गया था़ प्रभात क्लब के अध्यक्ष हजारी प्रसाद व सचिव जय प्रकाश नारायण सिंह के नेतृत्व में क्लब ने मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ किया है. इससे पूर्व साल 2005-06 में राज्य पर्यटन विभाग ने भी इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था़ क्लब के अध्यक्ष हजारी प्रसाद,सचिव जय प्रकाश नारायण सिंह व कोषाध्यक्ष मनदीप प्रसाद ने बताया कि प्रभात क्लब की स्थापना 1967 में हुई थी.

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