खुलने के साथ ही बंद हो गये 80 प्रतिशत धान अधिप्राप्ति केंद्र

Published by :Akarsh Aniket
Published at :11 Jan 2026 8:25 PM (IST)
विज्ञापन
खुलने के साथ ही बंद हो गये 80 प्रतिशत धान अधिप्राप्ति केंद्र

15 दिसंबर को खोले गये थे धान क्रय केंद्र, 40 से अधिक केंद्रों में नहीं हो रही खरीद

विज्ञापन

15 दिसंबर को खोले गये थे धान क्रय केंद्र, 40 से अधिक केंद्रों में नहीं हो रही खरीद पीयूष तिवारी, गढ़वा गढ़वा जिले में खुले धान अधिप्राप्ति केंद्र ‘देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत को चरितार्थ करते नजर नहीं आ रहे हैं. जिले में खोले गये 52 धान क्रय केंद्रों में से लगभग 80 प्रतिशत, यानी 40 से अधिक केंद्र, महज 10 से 15 दिन धान खरीदने के बाद ही हांफते हुए बंद हो गये हैं. इसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है, जिन्हें अब धान बेचने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. वर्तमान में जिले में मात्र 10 से 12 केंद्रों पर ही धान की खरीद हो रही है, जबकि शेष केंद्र बंद पड़े हैं. आमतौर पर गढ़वा जिले में 15 नवंबर से 30 नवंबर के बीच धान की कटनी और दवनी का कार्य पूरा हो जाता है. पूर्व वर्षों में 15 नवंबर से ही धान अधिप्राप्ति केंद्र खोले जाते रहे हैं, लेकिन इस वर्ष करीब एक महीने की देरी से 15 दिसंबर को एक साथ लगभग 10 केंद्र खोलकर खरीद की शुरुआत की गयी. इसके बाद लैंप्स, पैक्स और एफपीओ के माध्यम से धीरे-धीरे 52 केंद्रों पर खरीद शुरू हुई, लेकिन खुलते ही अधिकांश केंद्र बंद भी हो गये. दो लाख क्विंटल का लक्ष्य, अब तक 80 हजार क्विंटल की हुई खरीद गढ़वा जिले में इस वर्ष दो लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. अब तक करीब 900 किसानों से लगभग 80 हजार क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है. बोनस सहित जिले के 357 किसानों के बीच लगभग 7.35 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है. उल्लेखनीय है कि इस बार जिले में धान का उत्पादन बंपर हुआ है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार 55 हजार हेक्टेयर अच्छादन लक्ष्य के विरुद्ध लगभग 95 प्रतिशत क्षेत्र में धान की उपज हुई है. जिले में निबंधित किसानों की संख्या 13 हजार से अधिक है. धान क्रय केंद्र बंद नहीं हैं : जिला आपूर्ति पदाधिकारी इस संबंध में जिला आपूर्ति पदाधिकारी देवानंद राम ने कहा कि धान की खरीद बंद नहीं हुई है, बल्कि सभी केंद्रों पर खरीद की जा रही है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियमानुसार जब तक मिलर चावल की आपूर्ति नहीं करता, तब तक उसी अनुपात में किसानों से खरीदे गये धान का उठाव संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि एक क्विंटल धान के बदले 68 किलो उसना चावल मिलर को देना होता है. इसी प्रक्रिया के कारण कुछ विलंब हो रहा है, लेकिन क्रय केंद्र बंद नहीं किये गये हैं. नियम व नियंत्रण के अभाव में खरीद प्रभावित : विधायक गढ़वा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने इस मामले में राज्य सरकार और जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा शुरू से ही किसानों के प्रति सही नहीं रही है. विधायक ने कहा कि सही नियम और प्रभावी नियंत्रण के अभाव में धान की खरीद प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों के धान बरबाद होने की स्थिति में है. उन्होंने जिला प्रशासन से सभी धान क्रय केंद्रों को लगातार चालू रखते हुए जिले के प्रत्येक किसान से धान खरीद सुनिश्चित करने की मांग की है. उपायुक्त से की गयी केंद्र शुरू कराने की मांग इधर, मेराल प्रखंड के पेशका गांव के ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन देकर धान अधिप्राप्ति केंद्र पुनः शुरू कराने की मांग की है. आवेदन देने वालों में ग्रामीण विकास प्रजापति, सूदर्शन प्रजापति, अजय तिवारी, देवेंद्र विश्वकर्मा सहित अन्य शामिल हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पेशका स्थित धान अधिप्राप्ति केंद्र में खरीद का कार्य ठप हो गया है. पैक्स अध्यक्ष द्वारा बायोमैट्रिक प्रणाली में तकनीकी समस्या का हवाला देकर खरीद नहीं की जा रही है. ग्रामीणों ने मांग की है कि समस्या का शीघ्र समाधान कर खरीद तुरंत शुरू की जाये, ताकि उनका धान खराब न हो और उन्हें उचित मूल्य मिल सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Akarsh Aniket

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola