डेढ़ वर्ष बाद भी कार्रवाई नहीं

Published at :06 Feb 2016 5:56 AM (IST)
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डेढ़ वर्ष बाद भी कार्रवाई नहीं

गढ़वा : गढ़वा जिले के रमकंडा व रंका प्रखंड में बने विद्यालय भवन निर्माण में डिजाइन परिवर्तन कर बड़े पैमाने पर राशि की गड़बड़ी की गयी है. सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय सेजुड़े अभियंताओं व कर्मियों ने अपने मनमाने तरीके से विद्यालय भवन की लंबाई, चौड़ाई व उंचाई में परिवर्तन कर दिया है. ऐसा करके सर्व […]

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गढ़वा : गढ़वा जिले के रमकंडा व रंका प्रखंड में बने विद्यालय भवन निर्माण में डिजाइन परिवर्तन कर बड़े पैमाने पर राशि की गड़बड़ी की गयी है. सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय सेजुड़े अभियंताओं व कर्मियों ने अपने मनमाने तरीके से विद्यालय भवन की लंबाई, चौड़ाई व उंचाई में परिवर्तन कर दिया है.
ऐसा करके सर्व शिक्षा अभियान से आवंटित लाखों रुपये की राशि की हेरफेर की गयी है. इस गड़बड़ी को निगरानी व सतर्कता समिति की बैठक में सांसद वीडी राम के समक्ष उठाया था. प्रत्येक विद्यालय के निर्माण में 60 से 70 हजार रुपये की गड़बड़ी करने की बात सामने आयी थी. दोनों प्रखंडों को मिला कर करीब 15 विद्यालय चिह्नित किये गये थे, जहां इस तरह की गड़बड़ी हुई थी.
जांच में भी इसे सत्य पाया गया था तथा इसके लिए संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक सह ग्राशिस के सचिव व अभियंता को दोषी माना गया था. इसके आलोक में दोषियों से राशि रिकवरी करने व स्पष्टीकरण पूछते हुए कार्य मुक्त करने के निर्देश दिये गये थे. लेकिन इस बात को एक वर्ष से ज्यादा समय बीतने के बाद भी न तो राशि की रिकॉवरी की गयी है और न ही दोषी अभियंताओं पर कारवाई की गयी है. आठ फरवरी को पुन: निगरानी व सतर्कता समिति की बैठक आहूत की गयी है, जिसमें इस मामले को उठाया जाना है.
क्या है मामला
सर्व शिक्षा अभियान की राशि से गढ़वा जिले के रंका व रमकंडा प्रखंड में विद्यालय भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2010 के बाद किया गया था. जांच में जो बात सामने आयी है, उसके अनुसार इन प्रखंडों के अधिकांश विद्यालय भवनों के तय डिजाइन में परिवर्तन करते हुए बरामदा आठ फीट के स्थान पर छह फीट व छत की ढलाई 11 फीट के बजाय 10 फीट पर कर दिया गया है. ऐसा करके लाखों रुपये का बंदरबांट कर लिया गया था.
14 अक्तूबर 2014 को आयोजित निगरानी व सतर्कता समिति की बैठक में इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषीकर्मियों व अभियंताओं को कार्यमुक्त करने व राशि रिकवरी करने के निर्देश दिये थे. पुन: 30 मई 2015 को संपन्न हुई समिति की बैठक में जिला शिक्षा अधीक्षक की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि वे प्रत्येक माह अभियंताओं के वेतन से राशि की रिकवरी करेंगे.
लेकिन इसे मानने से इनकार करते हुए एक मुश्त राशि रिकवरी करने के निर्देश दिये गये थे. लेकिन निगरानी समिति के निर्देशों को धत्ता बताते हुए डेढ़ वर्ष होने के बाद भी इस मामले में एक रूपये की भी रिकवरी नहीं की गयी है. इधर आठ फरवरी को होनेवाली समिति की बैठक में इस मामले को जोर से उठाने की तैयारी चल रही है.
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