वन पट्टा के लोभ में काट रहे हैं जंगल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Feb 2016 8:42 AM (IST)
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दो साल में 200 एकड़ जंगल उजाड़ दिये गये रंका(गढ़वा) : रंका प्रखंड अंतर्गत पश्चिमी वन क्षेत्र से लगातार पेड़ों की कटाई से यह इलाका धीरे-धीरे मैदान के रूप में बदलता जा रहा है. पिछले करीब दो साल से आदिम जनजातियों ने करीब 200 एकड़ में फैले जंगल को काट कर उस जगह पर गांव […]
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दो साल में 200 एकड़ जंगल उजाड़ दिये गये
रंका(गढ़वा) : रंका प्रखंड अंतर्गत पश्चिमी वन क्षेत्र से लगातार पेड़ों की कटाई से यह इलाका धीरे-धीरे मैदान के रूप में बदलता जा रहा है. पिछले करीब दो साल से आदिम जनजातियों ने करीब 200 एकड़ में फैले जंगल को काट कर उस जगह पर गांव बसा लिया है. इसके कारण जहां दो वर्ष पूर्व घनघोर जंगल हुआ करता था, वहां अब आदिम जनजातियों द्वारा खेती की जा रही है.
यद्यपि इस मामले में वन विभाग ने अभी तक 40 लोगों पर मामला दर्ज किया है, किंतु कार्रवाई शून्य है. जंगल को काटनेवाले के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने के कारण जंगल को काट कर घर बसाने का सिलसिला थमा नहीं है. अभी भी हर रोज जंगल काटे जा रहे हैं. सिंजो निवासी वयोवृद्ध रामप्रसाद यादव ने बताया कि रंका पश्चिमी वन क्षेत्र के सिंजो मोड़ के पास कभी घनघोर जंगल हुआ करता था. यह आसपास के क्षेत्रों के लिए चर्चित जंगल था.
इस जंगल में बाघ, तेंदुआ, सांभर, हिरण, नीलगाय, मोर आदि रहा करते थे. लेकिन वन विभाग की लापरवाही के कारण यह जंगल नष्ट हो गया है. आसपास के लोगों ने इस संबंध में बताया कि आदिम जनजाति वनों का पट्टा पाने के लिए जंगल काट कर उस पर घर बना रहे हैं. पट्टा पाने के लिए आदिम जनजातियों में इस समय होड़ लगी हुई है. यदि यही स्थिति बरकरार रही, तो आनेवाले समय में पेड़ के नाम पर यहां पूरी तरह से और उजाड़ हो जायेगा.
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