जर्जर कमरे में होती है पढ़ाई

हाल धुरकी स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की छात्राओं का13जीडब्ल्यूपीएच5-प्रखंड कार्यालय का जर्जर भवन धुरकी(गढ़वा). धुरकी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के द्वितीय तल्ला का निर्माण 2009-10 में 20 लाख की लागत से शुरू किया गया था, लेकिन आज तक भवन का निर्माण पूरा नहीं कराया जा सका है. कमरे के अभाव में कस्तूरबा की छात्राएं उच्च […]
हाल धुरकी स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की छात्राओं का13जीडब्ल्यूपीएच5-प्रखंड कार्यालय का जर्जर भवन धुरकी(गढ़वा). धुरकी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के द्वितीय तल्ला का निर्माण 2009-10 में 20 लाख की लागत से शुरू किया गया था, लेकिन आज तक भवन का निर्माण पूरा नहीं कराया जा सका है. कमरे के अभाव में कस्तूरबा की छात्राएं उच्च विद्यालय के जर्जर कमरे में बैठ कर पढ़ने को मजबूर हैं. विद्यालय में 33 बेंच है, जो कि 100 छात्राओं के लिए पर्याप्त है. लेकिन विद्यालय में कु ल 305 छात्राओं का नामांकन है. इसके कारण छात्राओं को बैठने में काफी परेशानी होती है. वहीं विद्यालय में इंटर प्रथम व द्वितीय वर्ष में कुल 55 छात्राओं का नामांकन, लेकिन जगह के अभाव कारण वे उच्च विद्यालय में पढ़ायी कर रही हैं. यह विद्यालय शिक्षक के साथ-साथ उपस्कर का भी दंश झेल रहा है. विद्यालय में पढ़नेवाली छात्राओं ने बताया कि बेंच डेस्क के अभाव में उन्हें बोरे पर बैठ कर पढ़ना पड़ता है.भवन का दीवार भी जर्जर है, जो कभी भी गिर सकता है. इस संबंध में विद्यालय के वार्डेन अनिमा बेग से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि बेंच डेस्क के साथ-साथ भवन निर्माण के लिये कई बार जिला को पत्र लिखा गया है. लेकिन अभी तक भवन का निर्माण पूरा नहीं कराया जा सका. जबकि पैसे की पूरी निकासी कर ली गयी है.
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