बुढ़ापा में भी लकड़ी काटने की विवशता

Published at :27 Dec 2014 7:03 PM (IST)
विज्ञापन
बुढ़ापा में भी लकड़ी काटने की विवशता

धुरकी(गढ़वा). सरकार आदिम जनजातियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं. लेकिन आदिम जनजाति के जीविकोपार्जन में कितना बदलाव आ पाया है, इसका अंदाजा प्रखंड के मिरचइया गांव की आदिम जनजाति की बुधिया कुंवर की स्थिति को देख कर लगाया जा सकता है. बुधिया 80 वर्ष की उम्र में भी अपनी आजीविका के लिए […]

विज्ञापन

धुरकी(गढ़वा). सरकार आदिम जनजातियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं. लेकिन आदिम जनजाति के जीविकोपार्जन में कितना बदलाव आ पाया है, इसका अंदाजा प्रखंड के मिरचइया गांव की आदिम जनजाति की बुधिया कुंवर की स्थिति को देख कर लगाया जा सकता है.

बुधिया 80 वर्ष की उम्र में भी अपनी आजीविका के लिए मिरचइया के जंगल लकड़ी निकालने के लिए विवश है. बुधिया को न तो वृद्धावस्था पेंशन मिल रहा है और न ही ठंड से बचने के लिए कोई कंबल मिला. पहले बुधिया वनतुलसी काट कर अपना जीविकोपार्जन की, अब वनतुलसी खत्म होने पर वह लकड़ी काट कर बेच रही है.

बुधिया ने बताया कि पांच साल पहले ही उसका पति मर गया है. उसके तीन लड़के हैं. लेकिन तीनों जो कमाने के नाम से बाहर गये हैं, काफी दिनों से उनका अता-पता नहीं है, जिसके कारण बुढि़या अपने पेट भरने के लिए उम्र की ढलान पर भी शारीरिक श्रम करने के लिए विवश हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola