ओके ...भयमुक्त मतदान प्रशासन के लिए चुनौती

प्रतिनिधि, गढ़वाउग्रवाद प्रभावित गढ़वा जिले में भयमुक्त एवं निष्पक्ष वातावरण में चुनाव कराना प्रशासन के लिए कड़ी चुनौती होगी. यद्यपि पहले की अपेक्षा अब उग्रवादी गतिविधि पर काफी हद तक नियंत्रण है. उग्रवादी संगठन भाकपा माओवादी की बात की जाये, तो उसकी सक्रियता फिलहाल गढ़वा जिले के भंडरिया एवं बड़गड़ प्रखंड तक सिमट कर रह […]
प्रतिनिधि, गढ़वाउग्रवाद प्रभावित गढ़वा जिले में भयमुक्त एवं निष्पक्ष वातावरण में चुनाव कराना प्रशासन के लिए कड़ी चुनौती होगी. यद्यपि पहले की अपेक्षा अब उग्रवादी गतिविधि पर काफी हद तक नियंत्रण है. उग्रवादी संगठन भाकपा माओवादी की बात की जाये, तो उसकी सक्रियता फिलहाल गढ़वा जिले के भंडरिया एवं बड़गड़ प्रखंड तक सिमट कर रह गयी है. ये दोनों प्रखंड डालटनगंज-चैनपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ते हैं. लेकिन इन दिनों भाकपा माओवादी के अलावे टीपीसी-1, टीपीसी-2, जेजेएमपी जैसे उग्रवादी संगठनों की सक्रियता भी बढ़ी है. ये संगठन रमकंडा, रंका, चिनिया, डंडई, मझिआंव सहित कई अन्य थाना क्षेत्रों में कई बार दस्तक दे चुके हैं. भाकपा माओवादी का जहां चुनाव के दौरान वोट बहिष्कार का नारा रहता है, वहीं शेष उग्रवादी संगठनों की चुनाव के मामले में स्पष्ट नीति नहीं रहती है. चुनाव के समय उग्रवादी संगठनों पर अंदरूनी रूप से किसी न किसी प्रत्याशी के पक्ष में काम करने का आरोप लगता रहा है. एक तरफ उग्रवादी संगठन चुनाव में वोट बहिष्कार का पोस्टर चिपका कर आम मतदाताओं को भयभीत करने का प्रयास करते हैं, वहीं दूसरी तरफ इस दहशत के एवज में वे किसी खास प्रत्याशी के साथ समझौता कर उसे मदद भी करते रहे हैं. ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए पुलिस प्रशासन को आम जनता के बीच भयमुक्त वातावरण बनाना होगा. चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की उग्रवादी गतिविधि पर पूरी तरह अंकुश रखने के बाद ही आम जनता भयमुक्त होकर मतदान कर सकती है. विदित हो कि पिछले लोकसभा चुनाव से जिला प्रशासन मतदान में अधिक से अधिक मतदाताओं को शामिल कराने के लिए भी अभियान चला रहा है. यद्यपि इसका बहुत ज्यादा असर चुनाव में देखने को नहीं मिला. वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में गढ़वा जिले में जहां 61.15 प्रतिशत मतदान हुआ था, वहीं लोकसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत घट कर 60.87 पर आ गया. इस चुनाव में चुनाव आयोग ने 70 प्रतिशत से ऊपर मतदान कराने का अभियान चला रखा है. यह तभी हो सकता है, जब चुनाव के दौरान उग्रवादियों के किसी भी प्रकार के वोट बहिष्कार के अभियान को पूरी तरह से विफल करने के साथ आम जनता को आवश्यक रूप से मतदान करने के लिए प्रेरित किया जाये. 1300 जवानों की जरूरतजिला प्रशासन ने गढ़वा जिले के सभी 894 मतदान कें द्रों पर भयमुक्त वातावरण में चुनाव संपन्न कराने के लिए 1300 जवानों की आवश्यकता बतायी है. इसमें सीआरपीएफ के 87, जिला पुलिस बल के 780 एवं होमगार्ड के 412 जवानों को लगाने की बात कही गयी है. ये सभी जवान 667 भवनों में स्थित मतदान केंद्र पर तैनात किये जायेंगे. विदित हो कि उग्रवादी अथवा राजनीतिक हस्तक्षेप को देखते हुए 356 मतदान केंद्र को अतिसंवेदनशील एवं 434 मतदान केंद्र को संवेदनशील घोषित किया गया है. जिले के मात्र 104 मतदान केंद्र सामान्य बताये गये हैं, जहां जिला पुलिस बल अथवा होमगार्ड के जवानों की मदद से चुनाव संपन्न कराने की बात कही गयी है.
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