छह साल बाद भी पानी नहीं

Updated at : 24 Jun 2014 2:06 AM (IST)
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छह साल बाद भी पानी नहीं

हाल मेराल ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना का मेराल(गढ़वा) : प्रखंड मुख्यालय में छह साल पहले ही मेराल ग्रामीण पाइप पेयजलापूर्ति योजना का उदघाटन किया गया था. आज तक ग्रामीणों को एक बूंद भी पानी नहीं मिल सका है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह योजना बेकार साबित हो रही […]

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हाल मेराल ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना का

मेराल(गढ़वा) : प्रखंड मुख्यालय में छह साल पहले ही मेराल ग्रामीण पाइप पेयजलापूर्ति योजना का उदघाटन किया गया था. आज तक ग्रामीणों को एक बूंद भी पानी नहीं मिल सका है.

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह योजना बेकार साबित हो रही है. गौरतलब है कि अपने निर्माण काल के बाद से ही यह योजना जो बंद है, वह आज तक चालू नहीं हुआ. विदित हो कि मेराल प्रखंड मुख्यालय में पेयजल संकट को देखते हुए इस योजना की आधारशिला वर्ष 1999 में रखी गयी थी. बिहार के तत्कालीन जल संसाधन मंत्रीसह क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि गिरिनाथ सिंह ने 60 हजार गैलन की क्षमतावाले इस पेयजल आपूर्ति योजना का 28 अक्तूबर 1997 को शिलान्यास किया था. जलापूर्ति का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तीन नवंबर 2008 को तत्कालीन विधायक गिरिनाथ सिंह एवं सांसद घुरन राम ने संयुक्त रूप से इसका उदघाटन किया. लेकिन उदघाटन के बाद से ही इस योजना से जलापूर्ति का लाभ लोगों को नहीं मिल पाया. बताया जाता है कि यह योजना संवेदकों के द्वारा सही रूप से कार्य नहीं कराये जाने के कारण सफल नहीं

हो सकी.

यूरिया नदी से जलमीनार के लिए जो पाइप बिछायी गयी, वह काफी कमजोर होने के कारण पानी को टंकी तक पहुंचाने में असमर्थ रहा. जलापूर्ति योजना के लिए ग्रामीण कमेटी भी बनायी गयी थी. लेकिन निर्माण कार्य कमजोर होने के कारण कमेटी कोई भी अपनी भूमिका नहीं निभा सकी. आज स्थिति यह बन गयी है कि इसके कई जगह रखे पाइप बेकार होने के साथ इसके लिए बनाये गये क्वार्टर की र्इंट भी धीरे-धीरे चोरी होती जा रही है. यूरिया नदी में रखे पंप हाउस से मोटर एवं उसके दरवाजा खिड़की भी चोरी कर ली गयी. इसके कारण पेयजल आपूर्ति योजना पूरी तरह से अनुपयोगी साबित हुई.

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