गढ़वा. सरकारी चिकित्सकों ने बैठक कर दिखायी एकजुटता, बोले निजी प्रैक्टिस बंद कराया तो, होगा आंदोलन

Updated at : 02 Nov 2017 12:40 PM (IST)
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गढ़वा. सरकारी चिकित्सकों ने बैठक कर दिखायी एकजुटता, बोले निजी प्रैक्टिस बंद कराया तो, होगा आंदोलन

गढ़वा: गढ़वा सदर अस्पताल के 500 मीटर के अंदर निजी प्रैक्टिस करनेवाले सरकारी चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि उन पर कार्रवाई की गयी तो वे इसके विरुद्ध आंदोलन करेंगे़ सरकार के निर्देशानुसार सरकारी अस्पताल के 500 मीटर के अंदर नर्सिंग होम खोलना, निजी प्रैक्टिस करना, जांचघर चलाना आदि प्रतिबंधित है़ . सरकार ने […]

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गढ़वा: गढ़वा सदर अस्पताल के 500 मीटर के अंदर निजी प्रैक्टिस करनेवाले सरकारी चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि उन पर कार्रवाई की गयी तो वे इसके विरुद्ध आंदोलन करेंगे़ सरकार के निर्देशानुसार सरकारी अस्पताल के 500 मीटर के अंदर नर्सिंग होम खोलना, निजी प्रैक्टिस करना, जांचघर चलाना आदि प्रतिबंधित है़ .

सरकार ने यह सूचना काफी पहले ही जारी कर रखी है़, लेकिन अब तक इसे लागू करने की दिशा में कभी कोई पहल नहीं की गयी थी़ हाल के दिनों में इसको लेकर जिला प्रशासन की ओर से चेतावनी जारी की गयी है़ इस पर बुधवार को झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ के गढ़वा इकाई की एक बैठक सिविल सर्जन टी हेंब्रम की अध्यक्षता में चिकित्सकों की गयी़ बैठक में कहा गया कि यह निर्देश झारखंड के किसी भी जिले में लागू नहीं है़ इसलिए झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ से जुड़े गढ़वा के चिकित्सक इस आदेश को स्वीकार नहीं करेंगे़ उन्होंने जिला प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि किसी चिकित्सक पर कार्रवाई की गयी, तो सभी चिकित्सक एकजुट होकर आंदोलन को बाध्य होंगे़ चिकित्सकों ने कहा कि आइएमए भी उनके साथ हैं और आइएमए के अध्यक्ष व सचिव ने भी चिकित्सकों के आंदोलन का समर्थन करने की बात कही है़
प्रधान सचिव ने जारी कर रखा है आदेश
स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के पत्रांक 15/एनआरएचएम-01, (15), दिनांक 24 मार्च 2012 के अनुसार प्रधान सचिव ने आदेश जारी कर रखा है कि सरकारी सेवा में कार्यरत चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा संचालित निजी अस्पताल/क्लीनिक नर्सिंग होम/ डायग्नोस्टिक सेंटर/ पैथोलॉजिक जांच घर, शहरी क्षेत्र के अस्पताल परिसर के 500 मीटर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 250 मीटर की परिधि में नहीं रहेंगे़ लेकिन गढ़वा के चिकित्सकों का कहना है कि यह आदेश अव्यावहारिक है, इसलिए इसे झारखंड के किसी भी जिले में लागू नहीं किया गया है़
चिकित्सकों की कमी के कारण निजी प्रैक्टिस पर अंकुश लगाना सही नहीं
बैठक में कहा गया कि गढ़वा जैसे जिले में महामारी एवं अन्य बीमारी का काफी प्रकोप रहता है और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सदर अस्पताल में चिकित्सक के स्वीकृत पद के 74 के विरुद्ध यहां केवल 42 चिकित्सक ही कार्यरत है़ं कई सीएचसी में मात्र एक ही चिकित्सक सेवारत है़ं मरीजों के लिए दवा भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है़ सरकार द्वारा चिकित्सकों को जितनी सुविधा मिलनी चाहिए वह नहीं दी जा रही है़ उन्हें न तो समय पर वेतन मिल रहा है और न ही प्रोन्नति आदि का लाभ दिया जा रहा है़ केंद्र सरकार द्वारा घोषित गैर व्यावसायिक भत्ता ( नन प्रैक्टिशिंग एलाउंस) भी नहीं दिया जा रहा है़.

ऐसी परिस्थिति में निजी प्रैक्टिस पर अंकुश लगाना व्यावहारिक नहीं है़ बैठक में सिविल सर्जन के अलावे एसीएमओ डॉ कन्हैया प्रसाद, उपाधीक्षक एनके रजक, डॉ यूएन बरनवाल, डॉ बीके भारती, डॉ अमित कुमार, डॉ सुशील कुमार रमण, डॉ राकेश कुमार तरुण, डॉ अशोक कुमार, डॉ जीतेंद्र, डॉ दीपक कुमार सिन्हा, डॉ कमलेश कुमार, डॉ वीरेंद्र कुमार, डॉ रामविनोद कुमार, डॉ दिनेश कुमार, डॉ जेपी सिंह, डॉ अजीत कुमार सिंह आदि उपस्थित थे़

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