झारखंड : गढ़वा में सीडीपीओ रही आरती के पास कहां से आए थे आय से 28% अधिक संपत्ति ?

Updated at : 13 Oct 2017 7:08 AM (IST)
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झारखंड : गढ़वा में सीडीपीओ रही आरती के पास कहां से आए थे आय से 28% अधिक संपत्ति ?

कार्यालय सहायक के पास आय से 112 प्रतिशत अधिक संपत्ति रांची : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में गढ़वा में सीडीपीओ के रूप में पदस्थापित रहीं आरती कुमारी के पास आय से 28 प्रतिशत अधिक संपत्ति पायी गयी है. वहीं गढ़वा जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय सहायक राज कुमार प्रसाद के पास आय […]

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कार्यालय सहायक के पास आय से 112 प्रतिशत अधिक संपत्ति
रांची : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में गढ़वा में सीडीपीओ के रूप में पदस्थापित रहीं आरती कुमारी के पास आय से 28 प्रतिशत अधिक संपत्ति पायी गयी है.
वहीं गढ़वा जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय सहायक राज कुमार प्रसाद के पास आय से 112 प्रतिशत अधिक संपत्ति पायी गयी. एसीबी की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में लोकायुक्त ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है. गुरुवार को एसीबी ने दोनों के खिलाफ प्राथमिकी का प्रस्ताव तैयार कर लिया है.
एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, आरती कुमारी के गढ़वा में पदस्थापित रहने के दौरान उन पर विभिन्न योजनाओं में गड़बड़ी करने के अलावा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे थे. वहीं राज कुमार प्रसाद पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगा था.
सरकार के निर्देश पर मामले की जांच शुरू हुई थी. जांच के दौरान पाया गया कि आरती कुमारी ने विभिन्न वैध स्रोत से कुल 64 लाख रुपये अर्जित किये, लेकिन उन्होंने 82 लाख रुपये खर्च किये. यह व्यय उनकी संपत्ति से 28 प्रतिशत अधिक है. वहीं कार्यालय सहायक राज कुमार प्रसाद ने विभिन्न वैध स्त्रोत से कुल 15 लाख रुपये अर्जित किये, लेकिन उन्होंने 32 लाख रुपये व्यय किये. एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, सीडीपीओ के विभिन्न स्थानों पर मकान और जमीन होने से संबंधित भी जानकारी मिली है.
अनुसंधान के दौरान उनकी कुल अवैध संपत्ति में बढ़ोतरी हो सकती है. सीडीपीओ पर विभिन्न योजनाओं में गड़बड़ी करने और भ्रष्टाचार के जो आरोप लगे थे, उन आरोप के संबंध में पूर्व में गढ़वा डीसी के स्तर से जांच भी करायी गयी थी, लेकिन जांच में आरोप की पुष्टि होने से संबंधित तथ्य सामने नहीं आये थे. जांच पूरी होने के बाद मामले में एसीबी की ओर से लोकायुक्त को रिपोर्ट भेजी गयी थी. इसके आधार पर मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्णय लिया गया.
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