East Singhbhum News : झरना और नदी का पानी पीने को विवश है 10 हजार आबादी
Published by : ATUL PATHAK Updated At : 24 Jul 2025 11:49 PM
घाटशिला. बाघुड़िया पंचायत में 11 जलमीनार और 45 चापाकल खराब
गालूडीह. घाटशिला प्रखंड की बाघुड़िया पंचायत की करीब 10 हजार की आबादी पेयजल के लिए त्राहिमाम कर रही है. पंचायत के गांवों में कुल 11 सोलर जलमीनार व करीब 45 चापाकल खराब हैं. इस बरसात में ग्रामीण पहाड़ी झरना और पहाड़ी नदी के किनारे खाल से पीने का पानी ले रहे हैं. हालांकि, वर्तमान में पंचायत में मलेरिया और वायरल फीवर का प्रकोप फैला हुआ है. इसके बावजूद पंचायत वासियों को बरसात में पीने का साफ पानी नसीब नहीं हो रहा है. ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी है. मुखिया पविता सिंह, मुखिया प्रतिनिधि सुनील सिंह, ग्रामीण लखी सिंह, मिथिला सिंह, पार्वती सिंह, सरला सिंह, जोसना सिंह, पंचमी सिंह, भवानी सिंह, बुधनी सिंह आदि ग्रामीणों ने गुरुवार को खराब जलमीनार के पास बर्तन लेकर विरोध जताया. प्रखंड प्रशासन से जल्द खराब जलमीनार और चापाकल को दुरुस्त करने की मांग की.
इन जगहों की जलमीनार और चापाकल खराब:
नरसिंहपुर के रुगड़ीडीह में संतोष महतो के घर के सामने जलमीनार, जोड़घुटू में कार्तिक सिंह के घर पास जलमीनर, चापाकल मिट्टी धंसने से दब गया. इसी गांव में पंचु सबर के घर के पास जलमीनर, मुड़ुखाल में नीतीश कुमार महतो के घर के सामने जलमीनार, चापाकल, गुड़ाझोर के डुंगरी कुल्ही में इंद्रजीत सिंह के सामने सोलर जलमीनार, इसी गांव के सबर बस्ती में हलो सबर के घर के सामने जलमीनार, चाड़री में देवीलाल टुडू के घर सामने जलमीनार, पहाड़पुर में साकिला के घर के सामने जलमीनार, कासपानी में भाटो सोरेन के घर के सामने जलमीनार, काशिया के खेजुरडीह में अजित महतो के घर के पास जलमीनार,चापाकल, सुकरीगढ़िया में जल मीनार खराब पड़ी है.एक साल से नहीं मिल रहा फंड, मरम्मत कैसे कराएं : मुखिया
मुखिया ने बताया कि पंचायत वासी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. एक साल से पंचायत को फंड नहीं मिलने के कारण चापाकल एवं सोलर जलमीनार की मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं. विभाग से गुहार लगाकर थक गये हैं. कोई नहीं सुन रहा.बाघुड़िया पंचायत के 143 ग्रामीण पेंशन से वंचित
मुखिया पबिता सिंह ने बताया कि 2024 में बीडीओ को विधवा, वृद्धावस्था और सर्वजन पेंशन (50 प्लस) के लिए आवेदन सौंपा गया. कुल 143 लोगों को आज तक पेंशन स्वीकृति नहीं हुई. सभी गरीब और बेसहारा हैं. बीडीओ को कई बार रिमाइनंडर आवेदन दिया गया. हाल में 27 मई 25 को आवेदन सौंपकर स्वीकृति की मांग गयी. अब तक कुछ नहीं हुआ.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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