East Singhbhum News : ठेकेदार की लापरवाही से अधर में परियोजना

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 02 Jul 2025 12:16 AM

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मुसबानी : 884.21 लाख की सड़क व 90.37 लाख की पुल स्वीकृति के बाद भी मुख्यधारा से कटा सूर्याबेड़ा गांव

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मुसाबनी. पारूलिया एवं फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के पहाड़ों के बीच बसे गांव सूर्याबेड़ा के ग्रामीण सड़क नहीं होने के कारण परेशानी झेल रहे हैं. सूर्याबेड़ा गांव में विधायक की पहल पर 16 दिसंबर 2020 को जनता दरबार लगाकर जिले के तत्कालीन उपायुक्त सूरज कुमार ने 1 वर्ष में गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने समेत कई विकास योजनाओं की घोषणा की थी. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 16 दिसंबर 2023 को भुल्लूधूटू चौक में सड़क निर्माण योजना का शिलान्यास हुआ था. ग्रामीण कार्य विभाग कार्य मंडल जमशेदपुर की देखरेख में संवेदक आरके कंस्ट्रक्शन को काकदोहा होते हुए सूर्याबेड़ा तक 12.70 किमी सड़क 884.21 लाख की लागत से बनाने का काम शुरू किया. सड़क को पूर्ण करने की तिथि 13 मार्च 2025 थी. पर समय गुजर जाने के बाद भी आज भी सड़क अधूरी है. अधूरे सड़क के कारण सूर्याबेड़ा एवं आस पास के गांव एवं टोलों के ग्रामीणों को आवागमन की परेशानी झेलनी पड़ रही है.

ठेकेदार पुलिया निर्माण के लिए गड्ढा खोद कर छोड़ा, बरसात में आवागमन प्रभावित :

सड़क में धोबनी पंचायत के कालाझरी एवं आहारकोचा के बीच कोपाट नाला पर पुल का निर्माण का कार्य संवेदक आरके कंस्ट्रक्शन को मिला है. 90.37 लाख की लागत से पुल का कार्य पूरा करना है. पुल निर्माण 13 मार्च 2025 तक पूरा होना था, लेकिन अब तक अधूरा है. ठेकेदार गड्ढा खोदकर फाउंडेशन का निर्माण कर छोड़ दिया है. उक्त बरसाती नाला में बारिश के मौसम में पहाड़ों का पानी आने से आवागमन प्रभावित हो जाता है. पुल बन जाने से ग्रामीणों को परेशानी दूर हो जाती. पुल निर्माण के लिए बनाये गये गड्ढो को ऐसे ही छोड़ दिया गया है उसकी घेराबंदी भी नहीं की गयी है. ग्रामीणों के आवागमन के लिए डायवर्सन भी नहीं बनाया गया है. इसके कारण बरसात में ग्रामीणों को खेत के बीच कीचड़ से होकर मजबूरी में आवागमन करना पड़ रहा है.पुल निर्माण के गड्ढे में बारिश होने पर तेज बहाव से कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है. सूर्याबेड़ा, आहारकोचा आदि गांव के ग्रामीण बीमार को इलाज के लिए तथा गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने के लिए परेशानी झेलते हैं. खटिया में ढोकर पहाड़ी रास्ते से होकर काकड़ा झरना सड़क तक पहुंचाया जाता है. फिर वहां से एंबुलेंस एवं अन्य वाहन से अस्पताल ले जाते हैं. सूर्याबेड़ा के ग्रामीण डीसी के आश्वासन के साढ़े चार साल के बाद भी सड़क नहीं बनने से परेशानी झेल रहे हैं.

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