गालूडीह .
दारीसाई स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों की पहल से क्षेत्र के किसानों में जागरुकता आयी है. इसका सकारात्मक असर यह हुआ है कि रबी मौसम में पहले की तुलना में अब सरसों की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है. जहां पहले किसान सब्जियों एवं अन्य फसलों के बीच-बीच में मिश्रित रूप से सरसों की खेती करते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में किसान सरसों की एकल खेती अपनाने लगे हैं. यह बदलाव कोरोना काल 2020-21 से स्पष्ट रूप से देखने को मिला. उस दौरान जब बाहर काम करने वाले मजदूर अपने घर लौटे और रोजगार के साधन सीमित हो गए, तब लोगों ने खेती-किसानी को अपनाया. उसी समय से सरसों की खेती का रकबा बढ़ना शुरू हुआ, जो अब लगातार विस्तार लेता जा रहा है. दारीसाई कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान डॉ. जयंत लाल ने बताया कि इस वर्ष कृषि विज्ञान केंद्र दारीसाई की देखरेख में घाटशिला, धालभूमगढ़, चाकुलिया, डुमरिया, मुसाबनी, पोटका सहित अन्य क्षेत्रों के करीब 600 किसान डीआरएमआर प्रोजेक्ट एवं सीएफएलडी प्रोजेक्ट के तहत लगभग 240 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की एकल खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि सरसों की उन्नत किस्मों से अधिक मात्रा में और बेहतर गुणवत्ता वाला तेल प्राप्त होता है. अन्य फसलों की तुलना में सरसों से किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है. वर्तमान में धान की कटाई के बाद अधिकतर किसानों ने खेत जोतकर सरसों की बुआई कर दी है, जो अब लहलहाने लगी है.दारीसाई में स्थापित सरसों तेल पेराई मशीन बनी किसानों के लिए वरदान
दारीसाई कृषि विज्ञान केंद्र में सरसों की तेल पेराई मशीन भी स्थापित की गयी है. किसान यहां सरसों सुखाकर लाते हैं और कम लागत में पेराई कर तेल निकालकर ले जाते हैं. कुछ किसान तेल को बाजार में बेचते हैं, जबकि कुछ अपने घरेलू उपयोग के लिए रखते हैं. तेल पेराई मशीन की सुविधा उपलब्ध होने से भी किसानों का रुझान सरसों की खेती की ओर और अधिक बढ़ा है.
अधिक बारिश से बनी नमी, सरसों की फसल को मिला फायदा
इस वर्ष औसत से अधिक बारिश होने के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनी रही, जिससे सरसों की उपज बेहतर हुई है. अधिकतर किसानों ने धान कटाई के बाद उसी नमी युक्त खेत में हल चलाकर सरसों की बुआई कर दी, जिसका सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहा है. खेतों में सरसों की फसल लहलहाने लगी है और पीले फूलों से खेत सज गये हैं, जिससे इलाके की प्राकृतिक खूबसूरती भी बढ़ गयी है. किसानों का कहना है कि यदि फसल में कीट या रोग का प्रकोप नहीं हुआ तो इस बार अच्छी पैदावार और बेहतर आमदनी की पूरी उम्मीद है. हालांकि सरसों की फसल में कीटों का प्रकोप तेजी से फैलता है, जो कुछ ही दिनों में फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. किसानों के लिए सरसों अब केवल एक फसल नहीं, बल्कि उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है. सरसों की खेती का दोहरा महत्व है एक ओर इससे शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक तेल प्राप्त होता है, वहीं दूसरी ओर सरसों का उपयोग मसाले के रूप में भी किया जाता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

