झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में नकली शराब बनाने की मिनी फैक्ट्री का खुलासा, चार लोगों से पूछताछ, 4.61 लाख कैश बरामद

Published by : Guru Swarup Mishra Updated At : 01 Apr 2024 7:54 PM

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जांच करते पदाधिकारी

पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ में नकली शराब बनाने की मिनी फैक्ट्री का खुलासा हुआ है. इस मामले में चार लोगों से पूछताछ की जा रही है. इस दौरान 4.61 लाख कैश बरामद हुआ है.

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धालभूमगढ़ (पूर्वी सिंहभूम), परवेज: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में एसडीओ सच्चिदानंद महतो एवं एसडीपीओ अजीत कुमार कुजूर के नेतृत्व में अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गयी. धालभूमगढ़ चौक के पास चारचाका में एक पीएम आवास में नकली शराब बनाने की मिनी फैक्ट्री का खुलासा हुआ. यह कारोबार सरकारी शराब दुकान के पीछे बने पीएम आवास में भाड़े पर लेकर किया जा रहा था. इस काम को अंजाम देने वाले सरकारी शराब दुकान के कर्मचारी अजीत सिंह मौके से फरार हो गया, जबकि चार लोगों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. छापेमारी में भारी मात्रा में विभिन्न नामी-गिरामी शराब कंपनियों के रैपर, बोतल, सील करने वाले स्टीकर, खाली बोतल एवं स्पिरिट भरी बोतलें जब्त की गयी हैं. साथ ही 4,61,200 लाख कैश बरामद किया गया है.

नकली शराब बनाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
एसडीओ सच्चिदानंद महतो ने बताया कि कई दिनों से गुप्त सूचना मिल रही थी कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नकली शराब बनाई जा रही है. आचार संहिता लगने के कारण अवैध शराब पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है. इसके तहत आज छापेमारी की गई. नकली शराब बनाने वाले गिरोह का सरगना अजीत सिंह मौके से फरार हो गया, जबकि चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जहरीली शराब बनाकर अवैध कारोबारी लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. इन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. एसडीपीओ अजीत कुमार कुजूर ने कहा कि स्पिरिट में केमिकल मिलाकर जहरीली शराब बना कर युवा पीढ़ी की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है. यह एक गंभीर मामला है. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

करीब 1000 खाली बोतल एवं लेवल मिले
छापेमारी में मैकडॉवेल, आरपी, 8पीएम एवं आर एफ ब्रांड के रैपर भारी मात्रा में पाया गया. खाली बोतलों में विभिन्न कंपनियों के लेवल चिपकाए हुए थे, जबकि झारखंड सरकार का लोगो लगा हुआ तथा आबकारी विभाग लिखा हुआ सील करने का स्टीकर भी भारी मात्रा में जब्त किया गया है. दो कार्टून में लगभग 28 बोतल स्पिरिट की भी जब्त की गयी है. छापामारी दल में अंचलाधिकारी समीर कच्छप, कार्यपालक दंडाधिकारी अमन कुमार, थाना प्रभारी राजेंद्र कुमार सिंह के अलावा भारी संख्या में पुलिस बल शामिल थे. बाद में आबकारी विभाग के सहायक कमिश्नर आर एन रवानी एवं इंस्पेक्टर कुमार सत्येंद्र भी पहुंचे तथा नकली शराब की बोतल एवं रेपर का मिलान सरकारी दुकान की बोतलों से किया गया.

रूम की चाबी लाने के बहाने अजीत फरार
छापामारी दल जब वहां पहुंचा तो सरकारी शराब दुकान के कर्मचारी अजीत सिंह को रूम की चाबी लाने को कहा. चाबी लाने के बहाने वह वहां से फरार हो गया. कुछ देर बाद उसका भाई छापेमारी को देखने वहां पहुंचा. पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो वह डीएसपी एवं एसडीओ से ही बहस करने लगा. पुलिस ने उसे भी हिरासत में ले लिया है. पुलिस ने सरकारी शराब दुकान के कर्मी धर्मेंद्र कुमार, संजीत एवं सुजीत कुमार को भी हिरासत में ले लिया है उनसे गहन पूछताछ की जा रही है.

छापेमारी में मिले 4.61 लाख नकद
छापामारी के दौरान एक प्लास्टिक के झोले में नोटों के कई गड्डियां मिलीं. 500 के नोटों की गड्डियों को गिनने के बाद 4,61,200 लाख की राशि पाई गई. पुलिस ने इसे जब्त कर लिया है.

क्या बोले आबकारी विभाग के सहायक कमिश्नर
आबकारी विभाग के सहायक कमिश्नर आर एन रवानी ने बताया कि सरकारी शराब दुकान में नकली शराब नहीं पाई गई. नकली शराब बनाने के मामले में दुकान के कर्मचारियों का नाम आया है. इसलिए सभी कर्मचारियों को हटाकर नए कर्मचारियों की बहाली कर दी गयी है, जबकि एसडीओ ने स्वयं बारकोड एवं अन्य जांच में सरकारी दुकान में ही नकली शराब दिखाई थी, लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारी इसे मानने को तैयार नहीं थे. कहा कि मशीन में गड़बड़ी के कारण सही पता नहीं चल रहा है. दो दिन बाद जांच की जाएगी.

विभिन्न स्थानों में होती थी नकली शराब की सप्लाई
जानकारी के अनुसार यहां नकली शराब बनाने के बाद उसे धालभूमगढ़ से बहरागोड़ा तक एवं घाटशिला तक के कई ढाबों में तथा ग्रामीण क्षेत्र में भेजा जाता था. इस अवैध कारोबार में बीते कुछ वर्षों में कारोबारी ने करोड़ों की कमाई की है तथा लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया है. इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भी खुशी है. लोगों का कहना था कि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. इस प्रकार के अवैध कारोबार के लिए लोगों ने आबकारी विभाग को भी दोषी बताया, जिन्होंने आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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