East Singhbhum News : 78 बच्चों का भविष्य था दांव पर, सूचना देने पर रात में ही स्कूल को मिले''गुरुजी''

पहले दो टीचर का स्थानांतरण, फिर बचे एक पारा टीचर ने दे दिया इस्तीफा स्कूल में पढ़ाई हो गयी थी बाधित
डुमरिया. मंगलवार की सुबह समय 9 बजे किताब-कॉपी से भरा बस्ता टांगे बच्चे डुमरिया प्रखंड के बकराकोचा उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहुंचे, तो देखा कि कोई शिक्षक नहीं हैं. बच्चे काफी देर तक क्लासरूम में ही बैठे रहे, लेकिन शिक्षक नहीं आये. ग्रामीणों को जब इस बात की जानकारी मिली, वे स्कूल पहुंचे और व्यवस्था को कोसने लगे. ग्रामीणों ने कहा कि स्थानांतरण से पहले वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था क्यों नहीं की गयी? दूसरी ओर, ग्राम प्रधान बुधान सोरेन की अध्यक्षता में बैठक हुई. कहा गया कि 78 बच्चे रोज स्कूल आते हैं, लेकिन कोई उन्हें पढ़ाने नहीं आता. सरकारी लापरवाही और व्यवस्था की उदासीनता गांव के भविष्य को अंधेरे में धकेला जा रहा है. सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि जल्द ही पोटका विधायक संजीव सरदार से मिलकर शिक्षकों की तत्काल बहाली की मांग की जायेगी. अगर मांग नहीं मानी गयी, तो प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जायेगा.
डीएसइ से बात की गयी, तो तत्काल हुई कार्रवाई
स्कूल में शिक्षक नहीं होने के मामले की जानकारी मिलने पर प्रभात खबर ने पहल की. मंगलवार रात करीब आठ बजे जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसइ) आशीष पांडेय से बात कर उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया. फिर, डीएसइ ने अधीनस्थ अधिकारियों से पूरे वाक्ये को जाना. इसके तुरंत बाद पांच मिनट के भीतर ही उन्होंने एक शिक्षक का प्रतिनियोजन उक्त स्कूल में कर दिया. साथ ही इस्तीफा देने वाले पारा शिक्षक ठाकुर मार्डी से फोन पर बात की. पारा शिक्षक ने बताया कि उनकी उम्र हो गयी है, वे अकेले 78 बच्चों को पढ़ाने के साथ ही अन्य विभागीय कार्य नहीं कर पाते हैं. वे चाहते हैं कि बच्चे पढ़ाई करें, लेकिन व्यवस्था से तंग आकर इस्तीफा दिया है. डीएसइ ने उन्हें समझाया, तो पारा शिक्षक ठाकुर मार्डी ने कहा कि वे इस्तीफा वापस ले लेंगे और बच्चों को पढ़ायेंगे.क्या है मामला
डुमरिया प्रखंड के बकराकोचा उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पहले तीन शिक्षक थे, जिसमें दो सरकारी और एक पारा शिक्षक. पिछले दिनों दोनों सरकारी शिक्षकों का दूसरे जिलों में स्थानांतरण हो गया. अकेले पारा शिक्षक ठाकुर मार्डी पर 78 बच्चों की पढ़ाई, मूल्यांकन, प्रशासनिक कामकाज और रिपोर्टिंग का पूरा दबाव आ गया. उन्होंने बीआरसी से अतिरिक्त शिक्षक की मांग की, लेकिन अनसुना कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने प्रबंधन समिति को इस्तीफा सौंप दिया. सोमवार और मंगलवार को वे स्कूल नहीं गये.बीइइओ की लापरवाही है शोकॉज किया जायेगा
– इस मामले में बीइइओ द्वारा लापरवाही की बात सामने आयी है. पूर्व में ही यह आदेश दिया गया था कि जहां कहीं भी एकल विद्यालय है, वहां कम से कम एक शिक्षक का पदस्थापन किया जाये. साथ ही जब कोई शिक्षक बार-बार पत्राचार कर इसकी जानकारी दे रहे हैं, उसके बाद भी सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो रही है तो यह सीधे तौर पर कार्य में लापरवाही का मामला है. इस मामले में बीइइओ को शोकॉज किया जायेगा.
– आशीष कुमार पांडेय
, डीएसइ, पूर्वी सिंहभूमप्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
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