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East Singhbhum News : घाटशिला में खेती का स्वरूप बदला, खरीफ संग रबी फसलों पर बढ़ा किसानों का भरोसा

Updated at : 08 Feb 2026 12:45 AM (IST)
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East Singhbhum News : घाटशिला में खेती का स्वरूप बदला, खरीफ संग रबी फसलों पर बढ़ा किसानों का भरोसा

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सब्जी, गेहूं व सरसों की खेती में इजाफा, सिंचाई योजना से कृषि को मिली नयी रफ्तार

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घाटशिला. घाटशिला प्रखंड में अब किसान केवल खरीफ फसलों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि रबी फसलों की खेती पर भी विशेष ध्यान देने लगे हैं. प्रखंड कृषि विभाग के सर्वे के अनुसार, घाटशिला प्रखंड में कुल लगभग 34,596.04 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है. इसमें 14,400 हेक्टेयर भूमि खरीफ फसलों के अंतर्गत आती है, जिसमें लगभग 8,492 हेक्टेयर में खेती हो रही है. वहीं रबी फसलों की खेती अब लगभग 2,240 हेक्टेयर भूमि में की जा रही है. प्रखंड कृषि प्रभारी सह तकनीकी प्रभारी बीपीएम के अनुसार, अब तक घाटशिला प्रखंड में लगभग 2,210 हेक्टेयर भूमि में रबी फसलों की खेती हो चुकी है.

सब्जी उत्पादन में बढ़त, गेहूं-सरसों की भी बढ़ी खेती

सर्वे के मुताबिक, करीब 1,200 हेक्टेयर भूमि में टमाटर, बैंगन, लौकी, खीरा और नेनुआ जैसी सब्जियों की खेती की जा रही है. इसके अलावा गेहूं 200 हेक्टेयर, सरसों 500 हेक्टेयर, आलू 130 हेक्टेयर, चना 150 हेक्टेयर, धान 50 हेक्टेयर तथा मक्का 10 हेक्टेयर भूमि में बोया गया है. कुल मिलाकर रबी खेती का रकबा 2,240 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है.

पहले भूमि बंजर पड़ी थी, किसान बादल चंद्र रजक ने उगायी गेहूं

धरमबहाल पंचायत के ऐदलबेड़ा गांव के किसान बादल चंद्र रजक ने पहले बंजर पड़ी भूमि पर लगभग ढाई बीघा में गेहूं की खेती कर एक मिसाल पेश की है. उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सरसों की खेती से करीब चार क्विंटल उत्पादन हुआ था. इस वर्ष उन्होंने दो बीघा भूमि में सरसों के साथ चना की खेती भी की है. कृषि विभाग के अनुसार नहर, चेकडैम, कुसुम योजना के तहत डीप बोरिंग, जेएसएलपीएस द्वारा बोरिंग और पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचायी जा रही है. विभागीय एवं कल्याण पदाधिकारी संजय साहू और लखन पात्रा ने खेतों का निरीक्षण कर किसानों की सराहना की.

पहाड़ी क्षेत्रों में भी दिखी खेती की नयी तस्वीर:

घाटशिला प्रखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से सटे गांवों के किसान भी अब रबी खेती में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. कालचिती पंचायत के बासाडेरा, डायनमारी, रामचंद्रपुर, हीरागंज, दीघा, चापड़ी, केंदडांगा के अलावा भादुआ पंचायत के घोटीडूबा, पूनगोड़ा, खरसती, छोटा जमुना तथा बांकी पंचायत के लेदा, देवली, पुखुरिया, चाकदोहा सहित काशिदा पंचायत के तामुकपाल, बनबेड़ा, बड़ाकुर्शी, जोड़सा और बाघुड़िया गांवों में किसान रबी फसलों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. किसान गर्मी के मौसम में उपजायी गयी सब्जियों को बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं. तालाब, नहर, झरना और चेकडैम जैसे जल स्रोत खेती को संजीवनी दे रहे हैं.

महिलाओं की अहम भूमिका: कंचन कर

घाटशिला प्रखंड के बड़ाजुड़ी स्थित आरडीए संस्था के संस्थापक कंचन कर ने बताया कि कृषि क्षेत्र में बदलाव की शुरुआत वर्ष 2010-11 से हुई. वर्तमान में आरडीए से लगभग 3,500 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्होंने खेती को आजीविका का मजबूत साधन बनाया है. कंचन कर ने कहा कि घाटशिला में कृषि की प्रगति में महिलाओं की भूमिका अग्रणी रही है. उन्होंने किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का नया सर्वे कराने और सरकार द्वारा कृषि पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जतायी. साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने की दिशा में त्वरित कदम उठाने की मांग की.

कई पंचायतों में रबी व गरमा धान की खेती को बढ़ावा

घाटशिला प्रखंड की कई पंचायतों में किसान अब खेती के बेहतर तरीकों को अपना रहे हैं. बुरुडीह क्षेत्र के आसपास की पंचायतों के अलावा बड़ाकुशी, जोड़सा, काशिदा, हेंदलजुड़ी, बड़ाजुड़ी, कालचिती, भादुआ और काड़ाडूबा पंचायतों में किसान रबी मौसम में गरमा धान, सरसों और हरी सब्जियों की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. किसानों का कहना है कि जल स्रोतों का ऑनलाइन सर्वे हो रहा है, लेकिन किसानों और सिंचित भूमि का समग्र सर्वे भी जरूरी है, ताकि कृषि योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके. जहां नहर और जलस्रोत उपलब्ध हैं, वहां किसान गरमा धान की खेती भी करने लगे हैं.

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ATUL PATHAK

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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