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मुसाबनी उप डाकघर का भवन जर्जर, टूटकर गिर रहा खपड़ा

डीजी सेट भी पांच वर्षों से खराब पड़ाहै. शिकायत के बाद भी मरम्मत नहीं की जा रही है. बरसात में छत से पानी टपकता है.

मुसाबनी.

मुसाबनी उप डाकघर का संचालन वर्षों से एचसीएल/आइसीसी की ओर से आवंटित एक भवन में होता आ रहा है. खदानें बंद होने के बाद कंपनी ने मुसाबनी टाउनशिप के रखरखाव की जिम्मेदारी से पलड़ा झाड़ लिया है. जिस कारण डाकघर के भवन की मरम्मत वर्षों से नहीं हो पायी है. जिससे डाकघर का भवन जर्जर हो गया है. छत में लगी टीन में भी छेद हो गया है और खपड़ा टूट कर गिर रहा है. जर्जर भवन में धूप और गर्मी में डाकघर के छोटे से बरामदे में खड़े होकर ग्रामीणों को सेवाएं लेनी पड़ रही हैं.

700 एमआइएस खाताधारी हैं डाकघर में

डाकघर में लगभग 700 एमआइएस खाताधारी हैं. खदानों की बंदी के बाद वीआरएस लेने वाले पूर्व कर्मचारी एमआइएस स्कीम के तहत रुपया डाकघर में रखकर प्रत्येक माह राशि का उठाव कर परिवार चलाते हैं. वीआरएस लेने वाले वरीय नागरिक धूप में खड़े होकर डाकघर से प्रत्येक माह राशि लेने को मजबूर हैं. इधर, उप डाकघर में लगा 10 केवी का डीजी सेट पांच साल से खराब पड़ा है. जिससे बिजली जाने पर कामकाज प्रभावित होता है. डाकघर का शौचालय टूट गया है. जिससे डाक कर्मियों को परेशानी होती है.

28 शाखा मुसाबनी उप डाकघर के अधीन

मुसाबनी उप डाकघर के अधीन 28 शाखा डाकघर हैं. बदिया, बांकीशोल, बड़ा अस्ती, बड़ा बोतला, भागाबांधी, डुमरिया, कुंमड़ाशोल, कांटाशोल, पलाशबनी, खैरबनी, पारुलिया, भीतराआमदा समेत मुसाबनी, डुमरिया और गुड़ाबांदा क्षेत्र के लगभग 28 शाखा डाकघर के लिए मुसाबनी उप डाकघर से डाक का वितरण होता है. बिजली नहीं रहने से क्षेत्र की शाखा डाकघरों के लिए डाक वितरण बाधित हो जाता है. समय पर लोगों को डाक द्वारा सूचना नहीं मिल पाती है. इसका खामियाजा क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को उठाना पड़ता है. एमआइएस खाताधारी वरीय नागरिकों को भुगतान में विलंब होता है. मुसाबनी उप डाकघर में एक पोस्ट मास्टर, तीन सहायक, दो पोस्टमैन और एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी का पद सृजित है. चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी विभीषण नायक एक वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो गये. उनकी जगह पर किसी की पदस्थापना अब तक नहीं हुई है.

कई बार दी लिखित शिकायत, कार्रवाई नहीं

मुसाबनी उप डाकघर के पोस्टमास्टर मो इसराफिल के मुताबिक, जर्जर भवन और खराब पड़े डीजी सेट की मरम्मत के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत दी गयी. लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. बारिश के मौसम में डाकघर की छत से पानी टपकता है और शॉर्ट सर्किट से भवन की दीवारों में करंट का झटका लगता है. जर्जर डाकघर के भवन के कारण कभी भी बड़ी दुर्घटना होने की संभावना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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