जादूगोड़ा. यूसिल जादूगोड़ा के ठेका मजदूरों ने मंगलवार सुबह पांच बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. मजदूरों का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा की गई लगातार वादाखिलाफी और समझौतों का अनुपालन नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा सड़क पर उतरना पड़ा है. आंदोलन का नेतृत्व पूर्व जिला परिषद सदस्य व झामुमो नेता बाघराय मार्डी कर रहे हैं. उन्होंने प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाये हैं.
लिखित आश्वासन के बाद भी मजदूरों को नहीं मिली इएल की राशि :
तीन और चार दिसंबर 2025 को हुई त्रिपक्षीय वार्ता में प्रबंधन ने सभी मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया था. विशेषकर इएल (अर्जित छुट्टी) का भुगतान 15 दिनों के भीतर करने का वादा किया गया था, पर एक माह बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया. साथ ही अन्य मांगों पर भी कोई पहल नहीं की गयी. मकर संक्रांति के मौके पर इएल की राशि नहीं मिलने पर मजदूरों में गहरी नाराजगी है. हड़ताल के चलते जादूगोड़ा माइंस और यूसिल के कई विभागों में कामकाज पूरी तरह बंद है. गुस्से का आलम यह है कि स्थायी कर्मचारियों को भी काम पर जाने से रोक दिया गया है. पर इमरजेंसी सेवा जारी रखी गयी है.मृतक श्याम सोरेन के आश्रित को भी नहीं मिली नौकरी :
वर्ष 2024 ठेका मजदूर श्याम सोरेन की मौत के बाद परिजनों को नौकरी सहित 8 सूत्री मांगों पर प्रबंधन ने 07 जुलाई 2025 को लिखित आश्वासन दिया था कि अक्तूबर 2025 तक सभी मांगें पूरी कर दी जायेंगी. इसके बाद 10 सितंबर का समय दिया गया. इस पर कार्रवाई नहीं हुई. मजदूरों का आरोप है कि एक साल से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, कार्रवाई शून्य है. ठेका मजदूरों ने अस्पताल चौक के पास टेंट लगाकर रात्रि धरना शुरू किया है. मजदूर नेताओं का कहना है कि जब तक मांगों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने चेताया कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा, इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह यूसिल प्रबंधन की होगी.
सीएमडी मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेते : बाघराय
बाघराय मार्डी ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीएमडी किसी भी मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेते. मजदूरों और स्थानीय समस्याओं की लगातार अनदेखी हो रही है. इसी कारण यूसिल में औद्योगिक अशांति का वातावरण है. सीएमडी को हटाकर नए और जवाबदेह अधिकारी की नियुक्ति ही समाधान है.
विस्थापितों की नियुक्ति लिस्ट जल्द जारी करे यूसिल प्रबंधन, अन्यथा आंदोलन जारी रहेगा
जादूगोड़ा/नरवा.
यूसिल नरवा पहाड़ विस्थापित कमेटी की अगुवाई में विस्थापितों का रविवार को धरना प्रदर्शन के बाद सोमवार से अनिश्चितकालीन काम बंद कर दिया. कमेटी द्वारा आवश्यक सेवा के लिये कंपनी प्रबंधन को छूट दी है. यूसिल नरवा पहाड़ विस्थापित कमेटी के अध्यक्ष बुधराई किस्कु ने कहा कि यूसिल प्रबंधन विस्थापितों से किये गये वादा को अनदेखी कर रहा है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 को त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी. समझौते के अनुसार प्रत्येक वर्ष 8 विस्थापितों की नियुक्ति एवं 2023 में हुई समझौते में डेथ केस एवं पीढ़ी-दर पीढ़ी को नौकरी देने का वादा किया गया था. यूसिल प्रबंधन अपने वादा के अनुसार बीते वर्ष 2015 से 2025 तक 88 लोगों की यूसिल में स्थायी नौकरी होनी थी. पर कंपनी प्रबंधन द्वारा वादा पूरा नहीं किया गया. विस्थापित कमेटी के लोग कड़ाके की ठंड में भी अलाव जलाकर गेट पर जमे रहे.22 दिसंबर को प्रबंधन को दिया गया था अल्टीमेटम :
22 दिसंबर 2025 को कंपनी प्रबंधन को कमेटी द्वारा एक अल्टीमेटम दिया गया था. दिये गये. अल्टीमेटम के अनुसार 11 जनवरी को समय समाप्त हो गया.
12 जनवरी की बैठक असफल :
12 जनवरी 2026 को यूसिल प्रबंधन के साथ बैठक हुई. इसमें यूसिल के इडी श्री सिंघई, डीजीएम एम माहली एवं राकेश कुमार, गिरीश गुप्ता तथा सेनगुप्ता शामिल थे. इसके अलावा यूसिल नरवा पहाड़ विस्थापित कमेटी के हाड़तोपा ग्राम प्रधान पर्वत किस्कू, मदन मोहन दास, अनार मार्डी तथा गाजिया हांसदा शामिल हुए थे. सक्षम पदाधिकारी के नहीं रहने के कारण वार्ता विफल रही. इससे नाराज कमेटी द्वारा अनिश्चितकालीन नरवा पहाड़ माइंस में मांग के पूरा होने तक गेट जाम कर काम बंद रखने का निर्णय लिया और माइंस गेट जाम कर आवश्यक कार्य को छोड़ सभी कर्मियों को काम जाने से रोका गया. मौके पर बीडीओ भी पहुंचे. पर सक्षम पदाधिकारी की अनुपस्थिति में नियुक्ति पर कोई निर्णय नहीं हो सका.आश्वासन के बाद भी पहल नहीं : बुधराई किस्कू
विस्थापित कमेटी के अध्यक्ष बुधराई किस्कु ने कहा कि यूसिल डीसी एवं सीएमडी की अगुवाई में त्रिपक्षीय बैठक करे. वार्ता सकारात्मक हो, कंपनी प्रबंधन द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू किया जाए और नियुक्ति लिस्ट जारी करे तभी गेट जाम हटाया जायेगा. अन्यथा अनिश्चितकालीन काम बंद रहेगी. मौके पर विस्थापित कमेटी के अध्यक्ष बुधराई किस्कु, महासचिव मोचीराम सोरेन, कोषाध्यक्ष मदन मोहन दास, कार्यालय सचिव बुढ़न मुर्मू, ग्राम प्रधान युवराज टुडू, पर्वत किस्कु तथा दासमत मुर्मू तथा विस्थापित परिवार के सदस्य शामिल थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

