​जादूगोड़ा भाटिन माइंस में ठेका मजदूर अड़े हैं अपनी मांग पर, हड़ताल दूसरे दिन भी जारी

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प्रदर्शन करते ठेका मजदूर

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Jadugora: अपनी 16 मांगों को लेकर भाटिन माइंस के ठेका मजदूर लगातार दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे. इससे कंपनी को करोड़ों के नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है. प्रबंधन के अड़ियल रवैये का मजदूरों ने काफी विरोध किया.

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Jadugora: यूसिल के भाटिन माइंस में कार्यरत ठेका मजदूरों की हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही. मजदूरों ने काम बंद कर प्रबंधन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और अपनी 16 सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. मजदूरों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी बुनियादी सुविधाओं और श्रम अधिकारों की अनदेखी की जा रही है, जिससे वे आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं. हड़ताल के कारण यूसिल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है. अधिकारियों और मजदूरों के बीच लगभग 16 घंटे तक चली वार्ता भी बेनतीजा रही, जिसके बाद मजदूरों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया.

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कंपनी को करोड़ों का नुकसान

हड़ताल के कारण खनन और अयस्क ढुलाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे प्रबंधन को करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है. पूर्व जिला परिषद सदस्य बाघराय मार्डी ने कहा कि यूसिल प्रबंधन संस्थान को ठेका कंपनियों के भरोसे छोड़ रहा है, जिससे भविष्य में हालात गंभीर हो सकते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ठेका कंपनियां लगातार मजदूरों का शोषण कर रही हैं, अधिक काम लेकर कम वेतन दिया जा रहा है और सुविधाओं में कटौती की जा रही है.

मुखिया ने भी प्रबंधन पर लगाया आरोप

भाटिन पंचायत के मुखिया श्रीराम सोरेन ने भी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 25 फीसदी स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार देने का प्रावधान लागू नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ग्राम सभा की शर्तों और पर्यावरण स्वीकृति का उल्लंघन कर ठेका कंपनियों को खनन कार्य सौंपा गया है, जो नियमों के विरुद्ध है. इधर हड़ताल पर गए मजदूरों के खिलाफ प्रबंधन ने “नो वर्क, नो पे” का नोटिस जारी कर दिया है, जिससे मजदूरों में और नाराजगी बढ़ गई है. वार्ता के दौरान प्रबंधन द्वारा 10 दिन का समय मांगे जाने पर भी मजदूरों ने अविश्वास जताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है.

मजदूरों की प्रमुख मांगें

मजदूरों की 16 सूत्री मांगों में कार्यस्थल पर कैंटीन सुविधा, डीजीएमएस मानकों के अनुसार वेतन, नियुक्ति पत्र, प्रमोशन में पारदर्शिता, अवकाश नियमों का पालन, नाइट अलाउंस, चिकित्सा सुविधा, दुर्घटना पर मुआवजा, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन शामिल हैं. इसके अलावा पीएफ बकाया का निपटारा, लंबित भुगतान, पारदर्शी जांच प्रक्रिया और शिकायतों का समयबद्ध समाधान भी प्रमुख मांगों में शामिल है.

मजदूरों ने दी चेतावनी

मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. नये सीएमडी डॉ कचम आनंद राव के कार्यकाल में लगातार हो रही हड़तालों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. श्रमिकों का कहना है कि छोटी-छोटी मांगों के लिए भी हड़ताल करनी पड़ रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है. वहीं समय पर निर्णय नहीं लेने के कारण प्रबंधन को नुकसान उठाना पड़ रहा है. वार्ता में यूसिल के अधिकारी महेश साहू और मनोरंजन महाली सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.

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