बंगाल के परमिट पर बाहर भेजी जा रही लकड़ियां
Updated at : 09 Apr 2017 5:29 AM (IST)
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चाकुलिया. डिपो की आड़ में लकड़ी का अवैध धंधा जोरों पर चाकुलिया : चाकुलिया व आसपास की इलाके में वैध और अवैध डिपो की आड़ में लकड़ी का अवैध धंधा चल रहा है. पश्चिम बंगाल के परमिट पर यहां की अवैध लकड़ियों को बड़े शहरों में भेजा जा रहा है. प्रशासन इससे बेखबर है. जानकारी […]
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चाकुलिया. डिपो की आड़ में लकड़ी का अवैध धंधा जोरों पर
चाकुलिया : चाकुलिया व आसपास की इलाके में वैध और अवैध डिपो की आड़ में लकड़ी का अवैध धंधा चल रहा है. पश्चिम बंगाल के परमिट पर यहां की अवैध लकड़ियों को बड़े शहरों में भेजा जा रहा है. प्रशासन इससे बेखबर है. जानकारी के मुताबिक यहां के कमारीगोड़ा व हाटचाली के पास एक पुराने कारखाने समेत कई जगहों पर लकड़ी के कई वैध और अवैध डिपो हैं. इन डिपो में ग्रामीण इलाके से सरकारी और रैयती भूमि से वृक्षों का पातन कर पिक अप वैन से लकड़ियां लायी जाती है.
चार से पांच पिकअप वैन लकड़ियों को ढोने में लगे हैं. इससे क्षेत्र में वृक्षों का सफाया तेजी से हो रहा है. रैयती वृक्षों की आड़ में सरकारी भूमि और सड़कों के किनारे स्थित वृक्षों को काटा जा रहा है. पिकअप वैन से लकड़ियों को डिपो में लाने के बाद पश्चिम बंगाल के परमिट पर ट्रकों से लकड़ियों को अन्य शहरों में भेजा जाता है. लकड़ी लदा पिक अप वैन वजन के लिए खुलेआम धर्म कांटा तक लाये जाते हैं. यहां के कई साबुन कारखानों में अवैध लकड़ियों की आपूर्ति धड़ल्ले से हो रही है. पिकअप पर लदी लकड़ियों पर किसी की नजर नहीं पड़े, इसके लिए तिरपाल बांध दिया जाता है.
खबर है कि अमलागोड़ा के रास्ते पिक अप वैन से लकड़ियों को बंगाल भेजा जा रहा है. बेंद में वन विभाग के चेकनाका पर किसी के पदस्थापित नहीं होने से ऐसे अवैध धंधे बाजों के लिए राह आसान हो रही है. वैध डिपो में लकड़ी के परिवहन के लिए वन विभाग से परमिट लिए जाते हैं अथवा हीं, गहन जांच का विषय है.
चाकुलिया
साबुन कारखानों में अवैध लकड़ियों की हो रही आपूर्ति
बेंद में वन विभाग के चेकनाका पर जांच नहीं होने से तस्करों की बल्ले-बल्ले
सरकारी भूमि और सड़कों के किनारे स्थित वृक्षों को काटा जा रहा
सरकारी भूमि पर डिपो मिला, तो होगी कार्रवाई : सीओ
इस मसले पर सीओ गणेश प्रसाद महतो ने कहा कि अवैध लकड़ियों को ढोने के मामले पर नजर है. जल्द इसपर रोक लगाने की पहल होगी. उन्होंने कहा कि लकड़ी और बांस से डिपो की जांच होगी, ताकि यह पता चले कि डिपो रैयत भूमि पर है या सरकारी भूमि पर हैं. अगर सरकारी भूमि पर डिपो पाये गये तो कानूनी कार्रवाई होगी.
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