पटमदा में सूख कर बरबाद हुए फलदार पौधे

Published at :29 Nov 2016 4:47 AM (IST)
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पटमदा में सूख कर बरबाद हुए फलदार पौधे

पटमदा : केंद्र सरकार की नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (नामसा) योजना के तहत पूर्वी सिंहभूम के सिर्फ पटमदा व बोड़ाम प्रखंड के किसानों के लिए मंगाये गये लाखों रुपये के हजारों फलदार पौधा सूख कर बरबाद हो गये. इन पौधों के देखरेख की जिम्मेदारी स्वर्णरेखा नर्सरी चांडिल को दी गयी थी, जिसे टैगोर सोसाइटी […]

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पटमदा : केंद्र सरकार की नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (नामसा) योजना के तहत पूर्वी सिंहभूम के सिर्फ पटमदा व बोड़ाम प्रखंड के किसानों के लिए मंगाये गये लाखों रुपये के हजारों फलदार पौधा सूख कर बरबाद हो गये. इन पौधों के देखरेख की जिम्मेदारी स्वर्णरेखा नर्सरी चांडिल को दी गयी थी, जिसे टैगोर सोसाइटी फॉर रूरल डेवलपमेंट माचा, पटमदा में स्टॉक कर रखा गया था.

यहां से इन पौधा का वितरण किसानों के बीच किया जाना था. इन फलदार पौधों में मुख्य रूप से आम, अमरूद, नीबू, पपीता, काजू आदि शामिल थे. इस योजना का क्रियान्वयन जिला कृषि विभाग की देखरेख में पटमदा के राखडीह, बेलडीह, दोगड़ीगोड़ा, चुड़दा, बासगढ़, बनतोड़िया एवं बोड़ाम के मुचिडीह, कुड़यामी व बाधरा में किया जाना था. नामसा के तहत ही वर्ष 2015-16 में पटमदा व बोड़ाम में 50 फीसदी अनुदान पर किसानों को धान सुरक्षित रखने के लिए टीना शेड का निर्माण कराया गया था, इनमें से आज भी कई अधूरे हैं. मालूम हो कि सरकार द्वारा एनएमएसए (नामसा) योजना की शुरुआत किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए की गयी थी, लेकिन यह अब तक पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतर पाया है. नहीं किसानों को ही इस योजना के बारे किसी तरह की जानकारी ही दी गयी है.

नामसा का उद्देश्य

नामसा योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की परती जमीन का उपयोग कर पौधरोपण करना है. इसके तहत पौधरोपण के लिए गड्ढा खोदन से लेकर पौधरोपण करने तक की सारे कार्य कृषि विभाग को चयनित संस्थान के माध्यम से करना है. इसके अलावा प्रचार-प्रसार के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस योजना से जोड़ना है.

मृत पौधे का पैसा काटा जायेगा : कलीपदो महतो

मामले पर जिला कृषि पदाधिकारी कालीपदो महतो ने कहा कि नामसा के तहत अब तक 50 प्रतिशत अनुदान पर पटमदा व बोड़ाम के विभिन्न गांवों में किसानों के खेत में पांच से सात हजार फलदार पौधा लगाये गये हैं. पौधरोपण की जिम्मेवारी चांडिल के स्वर्णरेखा नर्सरी संस्थान को दी गयी है. किसानों के खेत में गड्ढे खोदने से लेकर पौधा लगाने का काम विभाग की देखरेख में किया गया है. उन्होंने पौधों के सूखने के मामले पर कहा कि इसका आकलन कर संस्थान से राशि की कटौती की जायेगी. वर्ष 2015-16 में रांची के संस्थान को दिये गये शेड निर्माण का कार्य कुछ अधूरा रह गया है. मनरेगा से बने कुआं के लाभुकों को कृषि विभाग द्वारा 90 फीसदी अनुदान पर खेती के लिए पंप सेट दिया जायेगा, जिसकी सूची तैयार की जा रही है.

आज तक एक भी पौधा नहीं लगा : हलधर

दोगड़ीगोड़ा गांव के हलधर महतो ने बताया कि एक-दो माह पूर्व कुछ लोगों द्वारा उनके खेत में पौधा लगाने के नाम पर जहां-तहां गड्ढे की खुदाई की गयी, लेकिन आज तक एक भी पौधा नहीं लगाया गया. श्री महतो ने कहा कि योजना के बारे उनसे पूछे जाने पर भी कुछ नहीं बताया गया.

रोपे गये पौधे भी सूखे : भीम चंद्र महतो

बेलडीह गांव के किसान भीम चंद्र महतो ने बताया कि आषाड़ व सावन माह के बजाय अक्तूबर माह में विभाग द्वारा परती खेतों में पौधे लगाये गये, परिणाम स्वरूप वे भी सूख गये. पौधरोपण में भी किसी तरह की सतर्कता नहीं बरती गयी, जिससे रेखरेख के अभाव में पौधे सूख गये. बार-बार पूछने जाने पर भी योजना को लेकर किसी तरह की जानकारी नहीं दी गयी. बाइक से मजदूर आये और जैसे-तैसे पौधा लगाकर चले गये.

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