मेडिकल वेस्ट के लिए तीन स्थल चयनित

Published at :14 Nov 2015 7:57 AM (IST)
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मेडिकल वेस्ट के लिए तीन स्थल चयनित

जमशेदपुर : जिले में संचालित सभी अस्पतालों, क्लिनिकों, ब्लड बैंकों, पैथोलॉजी लेबोरेटरी आदि के मेडिकल कचरा का निष्पादन के लिए जिले में तीन स्थल चयनित किये गये हैं. सब कुछ ठीक रहा तो मुसाबनी, घाटशिला या बहरागोड़ा में से किसी स्थल पर मेडिकल कचरा निष्पादन के लिए प्लांट लगाया जायेगा. जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति ने […]

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जमशेदपुर : जिले में संचालित सभी अस्पतालों, क्लिनिकों, ब्लड बैंकों, पैथोलॉजी लेबोरेटरी आदि के मेडिकल कचरा का निष्पादन के लिए जिले में तीन स्थल चयनित किये गये हैं. सब कुछ ठीक रहा तो मुसाबनी, घाटशिला या बहरागोड़ा में से किसी स्थल पर मेडिकल कचरा निष्पादन के लिए प्लांट लगाया जायेगा. जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति ने स्थलों को चिह्नित कर मंजूरी के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के क्षेत्रीय पदाधिकारी को प्रस्ताव भेजा है.
प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी.
गौरतलब हो कि पूर्व में चिह्नित जमीन मापदंड के अनुरूप नहीं मिलने पर प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था. बाद में जेएनएसी के विशेष पदाधिकारी दीपक सहाय ने सरकार को पत्र लिखा. उनके पत्र के बाद सरकार ने मामले में हस्तेक्षप कर जिला प्रशासन काे स्थल चिह्नित कर प्रस्ताव मांगा था. प्रस्ताव पर घाटशिला एसडीओ ने मुसाबनी अंचल के कुलामारा, घाटशिला के पहाड़पुर और बहरागोड़ा के सिंहपुरा में स्थल चयनित कर प्रस्ताव डीसी के पास के भेजा. डीसी के आदेश पर एडीसी ने जेएनएसी को प्रस्ताव भेज दिया. जेएनएसी ने तत्काल प्रस्ताव प्रदूषण बोर्ड को भेज दिया.
मेडिकल कचरा को लेकर हाइकोर्ट ने दिखायी है गंभीरता
हाइकोर्ट ने अस्पतालों से उत्सर्जित मेडिकल कचरा के निष्पादन के लिए बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल एंड हैंडलिंग रूल्स 1998 के तहत त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. रूल्स के तहत अस्पतालों, क्लिनिकों, पैथोलॉजी लेबोरेटरी आदि के परिसरों में काला, लाल, ब्लू व पीले रंग का कंटेनर रखा जाये. कंटेनरों में ही मेडिकल कचरा रखा जाये और उसका निष्पादन किया जाये. खुले में मेडिकल कचरा फेंकना काफी खतरनाक है.
जेएचआरसी ने जनहित याचिका दायर कर मेडिकल कचरे के निष्पादन के लिए सरकार को उचित आदेश देने का आग्रह किया था.
5 साल की सजा का प्रावधान
बायो मेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल में लापरवाही बरतने पर इंवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 के अनुसार आरोपियों को 5 साल तक कैद व एक लाख रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों एक साथ देने का प्रावधान है.
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