जानवरों के खाने लायक भी नहीं हैं गोदाम में रखे अनाज

Published at :15 Jun 2015 8:07 AM (IST)
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जानवरों के खाने लायक भी नहीं हैं गोदाम में रखे अनाज

रखे-रखे सड़ गये 463 क्विंटल चावल व 62 क्विंटल गेहूं जांच टीम की रिपोर्ट में हुआ खुलासा मनीष सिन्हा जमशेदपुर : घाटशिला के डुमरिया प्रखंड में कर्मचारी व अधिकारियों की लापरवाही से गोदाम में रखे करीब 525 क्विंटल अनाज (463 क्विंटल 74 किलो चावल और 62 क्विंटल 77 किलो गेहूं) सड़ गये. यहां चावल संपूर्ण […]

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रखे-रखे सड़ गये 463 क्विंटल चावल व 62 क्विंटल गेहूं
जांच टीम की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
मनीष सिन्हा
जमशेदपुर : घाटशिला के डुमरिया प्रखंड में कर्मचारी व अधिकारियों की लापरवाही से गोदाम में रखे करीब 525 क्विंटल अनाज (463 क्विंटल 74 किलो चावल और 62 क्विंटल 77 किलो गेहूं) सड़ गये. यहां चावल संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एसजीआरवाइ) के तहत रखे गये थे. लंबे समय से गोदाम में रखने और देखभाल नहीं होने के कारण बारिश के पानी और चूहा व चमगादड़ के मल मिश्रित होने से अनाज पूरी तरह सड़ गये.
अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने पर जांच टीम गठित की गयी और जांच रिपोर्ट में बताया गया कि यहां रखे अनाज पशुओं के खाने लायक भी नहीं हैं.
क्या है मामला : केंद्र सरकार ने सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ खाद्य सुरक्षा की गारंटी के लिए 25 सितंबर 2001 को संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एसजीआरवाइ) शुरू की थी. इसके तहत मजदूरी की राशि के साथ काम के बदले अनाज देना था. इसलिए डुमरिया के गोदाम में वर्ष 2004 से 07 में 463 क्विंटल 74 किलो चावल और 62 क्विंटल 77 किलो गेहूं रखा गया था. 2006 में केंद्र सरकार ने एसजीआरवाइ बंद कर दी और मनरेगा को चालू किया गया. योजना बंद होने के बाद उस समय के बीडीओ को अनाज का निष्पादन कर राशि मनरेगा में दे देने का निर्देश दिया गया, लेकिन उस दौरान ऐसा नहीं किया गया.
प्रखंड कार्यालय में कार्यरत लिपिकों ने इस पर ध्यान नहीं दिया. स्थानांतरण के बाद नये लिपिक को पूर्व लिपिकों द्वारा गोदाम में अनाज होने की जानकारी नहीं दी गयी, जिस कारण बाद में आये लिपिकों को अनाज रखे होने की जानकारी नहीं हुई. वर्तमान बीडीओ मृत्युंजय कुमार को योगदान देने के बाद गोदाम में अनाज होने और सड़ जाने की जानकारी हुई, तो उन्होंने प्रखंड स्तरीय सहायक गोदाम प्रभारी, चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की जांच टीम गठित कर इसकी जांच करायी.
जांच टीम ने 27 अप्रैल 15 को गोदाम में जाकर जांच की. जांच टीम ने पाया कि गोदाम में रखा अनाज 2004 से 2007 के बीच का है.जांच टीम ने पाया कि लंबे समय से रखे होने के कारण अनाज की गुणवत्ता का खराब हुई है अनाज मनुष्य एवं पशु के उपयोग लायक सुरक्षित नहीं है. बारिश का पानी, चूहों और चमगादड़ का मल मिश्रित होकर पूरी तरह सड़ गया है.
जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी: बीडीओ ने पूरे मामले से जिला प्रशासन को अवगत करा दिया है. जिम्मेदार कर्मचारी और पदाधिकारियों पर कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है. जिला प्रशासन के निर्देशानुसार डुमरिया के वर्तमान बीडीओ द्वारा रिकॉर्डो का अध्ययन कर अनाज सड़ने के लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं, इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है.
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