चतरा के सदर अस्पताल में महिला ने किया शवों का पोस्टमार्टम, दिलेरी की हो रही चौतरफा तारीफ

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :25 Apr 2026 4:22 PM (IST)
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Chatra News

चतरा के सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम करने वाली ममता देवी (दाएं).

Chatra News: चतरा सदर अस्पताल में ममता देवी ने पहली बार पुरुष शव का पोस्टमार्टम कर इतिहास रचा. नियमित कर्मी के विवाद के बीच उन्होंने साहस दिखाया. यह घटना महिला सशक्तिकरण और बदलती सामाजिक सोच का प्रतीक बन गई है, जिससे झारखंड में नई मिसाल कायम हुई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चतरा से दीनबंधू और मो तसलीम की रिपोर्ट

Chatra News: झारखंड के चतरा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज में महिलाओं की भूमिका को लेकर नई सोच को जन्म दिया है. चतरा का सदर अस्पताल अब राज्य का पहला ऐसा अस्पताल बन गया है, जहां एक महिला ने पुरुष के शव का पोस्टमार्टम किया. यह कदम न सिर्फ साहसिक है, बल्कि पारंपरिक धारणाओं को भी चुनौती देता है. इस घटना के बाद पूरे इलाके में ममता देवी की चर्चा हो रही है.

ममता देवी की हिम्मत ने बदली तस्वीर

शहर के बिंड मोहल्ला निवासी ममता देवी, जो दीपू सिंह की पत्नी हैं, ने यह साहसिक कार्य किया. उन्होंने अपने जीवन का पहला पोस्टमार्टम सड़क दुर्घटना में मृत राजेश शर्मा के शव का किया. यह काम सामान्य नहीं माना जाता, क्योंकि पोस्टमार्टम के दौरान कई कठिन और संवेदनशील प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. इसके बावजूद ममता देवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के यह जिम्मेदारी निभाई.

लगातार दो शवों का किया पोस्टमार्टम

इतना ही नहीं, पहले पोस्टमार्टम के लगभग एक घंटे बाद लावालौंग से आए एक और शव का पोस्टमार्टम भी उन्होंने किया. लगातार दो पोस्टमार्टम कर ममता देवी ने यह साबित कर दिया कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता दिखा सकती हैं.

पोस्टमार्टम कर्मी पर आरोप के बाद बनी स्थिति

दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम अचानक बने हालात का नतीजा था. सदर अस्पताल के नियमित पोस्टमार्टम कर्मी सुखदेव राम पर एक दिन पहले ही 5000 रुपये लेने का आरोप लगा था. इस आरोप के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें काम से रोक दिया था.

जब राजेश शर्मा का शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया, तब कोई अन्य कर्मचारी उपलब्ध नहीं था. सुखदेव राम जिले का एकमात्र पोस्टमार्टम कर्मी था और उसने काम करने से साफ इनकार कर दिया. अस्पताल प्रबंधन ने काफी कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया.

10 मिनट में पहुंची ममता देवी, संभाली जिम्मेदारी

इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन को ममता देवी की याद आई. ममता देवी ने कुछ दिन पहले ही सिविल सर्जन को आवेदन देकर बताया था कि वह पिछले 15 वर्षों से निजी अस्पतालों में नर्स के रूप में काम कर रही हैं और उन्हें रोजगार की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा था कि वह पोस्टमार्टम का कार्य करने में सक्षम हैं.

मुसीबत की इस घड़ी में सिविल सर्जन ने उन्हें फोन किया. ममता देवी ने बिना देर किए चुनौती स्वीकार कर ली और मात्र 10 मिनट के भीतर पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गईं. वहां उन्होंने अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पंकज कुमार और डॉ अजहर के साथ मिलकर सफलतापूर्वक पोस्टमार्टम किया.

डॉक्टरों ने की सराहना, बताया प्रेरणादायक

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पंकज कुमार ने ममता देवी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम के दौरान शव पर काम करना आसान नहीं होता, कई अनुभवी लोग भी घबरा जाते हैं. लेकिन ममता देवी ने पहली ही बार में बेहद कुशलता और आत्मविश्वास के साथ सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं. उन्होंने यह भी कहा कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं और ममता देवी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं. उनकी यह पहल अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी.

जल्द मिल सकती है स्थायी नियुक्ति

अस्पताल प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि ममता देवी को जल्द ही पोस्टमार्टम कर्मी के रूप में नियुक्त किया जा सकता है. डॉ पंकज कुमार के अनुसार, एक से दो दिनों के भीतर इस पर निर्णय लिया जाएगा. यदि ऐसा होता है, तो यह न सिर्फ ममता देवी के लिए बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक अहम कदम साबित होगा.

समाज में बदलती सोच का संकेत

यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज में बदलती सोच का प्रतीक है. जहां पहले कुछ कामों को केवल पुरुषों तक सीमित माना जाता था, वहीं अब महिलाएं उन क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही हैं.

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चतरा सदर अस्पताल की यह पहल और ममता देवी का साहस आने वाले समय में कई महिलाओं को प्रेरित करेगा. यह साबित करता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं और समाज में नई मिसाल कायम कर सकती हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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