ओलिंपिक में जाना अब मकसद : लक्ष्मी रानी

Published at :11 Feb 2015 8:31 AM (IST)
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ओलिंपिक में जाना अब मकसद : लक्ष्मी रानी

घाटशिला : कोच्ची में खेले जा रहे नेशनल गेम्स में रिकर्व महिला तीरंदाजी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली घाटशिला की बगुला निवासी लक्ष्मी रानी मांझी से दूरभाष पर प्रभात खबर ने बात की. जब लक्ष्मी के मोबाइल पर घाटशिला से फोन लगाया गया, तो वह ट्रेन पर थी और हैदराबाद जा रही थी. लक्ष्मी […]

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घाटशिला : कोच्ची में खेले जा रहे नेशनल गेम्स में रिकर्व महिला तीरंदाजी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली घाटशिला की बगुला निवासी लक्ष्मी रानी मांझी से दूरभाष पर प्रभात खबर ने बात की. जब लक्ष्मी के मोबाइल पर घाटशिला से फोन लगाया गया, तो वह ट्रेन पर थी और हैदराबाद जा रही थी. लक्ष्मी रानी ने कहा कि हमारा पैतृक गांव घाटशिला का बगुला है.
वहीं जन्मी, पली और बढ़ी थी. पिताजी को यूसिल में नौकरी मिली, तो हम लोग नरवा स्थित क्वार्टर में आ गये थे. वहीं वर्तमान में हमारे माता-पिता और भाई-बहनें रहती है. लक्ष्मी ने कहा कि मैं 2003 से तीरंदाजी में आयी हूं. पूणो स्थित एकेडमी में चयन होने के बाद से लगातार तीरंदाजी में निखार आया और कई मेडल अब तक जीत चुकी है.
कोच धर्मेद्र सर का बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने कहा कि कोरिया नेशनल गेम्स में भाग ले चुकी हूं. जमशेदपुर में आयोजित नेशनल गेम्स में खेल चुकी हूं. इसके अलावा कई प्रतियोगिता में हाथ आजमा चुकी हूं. अब ओलिंपिक में जाना ही मकसद है. लक्ष्मी ने कहा कि कोच्ची में आयोजित नेशनल गेम्स में रिकर्व महिला तीरंदाजी में गोल्ड मेडल मिलने से हौंसला बढ़ा है.
उन्होंने कहा कि मैं जल्द ही अपने पैतृक गांव बगुला आउंगी. ग्रामीण लड़कियों को उत्साहित करूंगी. तीरंदाजी से जोड़ने के लिए प्रेरणा दूंगी. उन्होंने कहा कि माता-पिता लड़कियों को अवसर दे.
मैं भी एक छोटे से गांव से बाहर निकल कर आयी और सफलता पायी. अवसर मिला, तभी कुछ कर पायी. लड़कियों को अवसर नहीं मिलता. माता-पिता और परिजन सोचते हैं अकेली लड़की कहां जायेगी, क्या करेगी. इसी सोच के कारण प्रतिभाशाली लड़कियां अपनी प्रतिभा को दिखा नहीं पाती. समाज को खुले दिमाग से बेटियों के प्रति सोचना होगा.
मो परवेज/ललन सिंह/अनिरुद्ध
घाटशिला/नरवा : कोच्ची में खेले जा रहे नेशनल गेम्स में रिकर्व महिला तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली लक्ष्मी रानी माझी घाटशिला की बगुला निवासी है. बगुला में वह जन्मी, पली और बढ़ी. वहीं तीरंदाजी में अपनी सफलता से गांव व जिले का नाम रोशन कर दिया.
लक्ष्मी की सफलता पर प्रभात खबर संवाददाता उनके पैतृक गांव बगुला पहुंचा. ग्रामीण गांव की बेटी की सफलता से अनजान थे. उन्हें बताया गया कि लक्ष्मी गोल्ड मेडल जीती है. यह सुनते ही ग्रामीण और उनके परिजन खुशी से उछल पड़े.
बगुला में लक्ष्मी के चचेरा दादा कोंदा माझी, दादी उपल मुमरू, नाना बरजू मुमरू, अन्य परिजन साकला मुमरू, सुमित्र मुमरू आदि उपस्थित थे. कई ग्रामीण भी लक्ष्मी के घर के पास उपस्थित थे. ग्रामीणों से पूछा गया कि क्या आप लोगों को लक्ष्मी द्वारा गोल्ड मेडल जीतने की खबर नहीं मिली है, तो ग्रामीणों ने कहा कि नहीं. आप से खबर मिली, बहुत खुशी हुई. गांव की बेटी बड़ा नाम करेगी. ग्रामीणों ने बताया कि लक्ष्मी के पिता यूसिल में नौकरी करते हैं. उनके पिता दिकू माझी, मां पद्मीनी माझी, भाई सूरज माझी और दो बहनें तारा और ज्योति माझी यूसिल के नरवा स्थित क्वार्टर नंबर नौ और ब्लॉक नंबर ए/2 में रहते हैं.
लक्ष्मी बगुला में जन्मी थी, यहीं पढ़ी लिखी और बड़ी हुई है. शुरू से तीरंदाजी से उसका लगाव रहा. वह सफलता के शिखर पर जाये यहीं कामना गांव वालों ने की है.
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