शौचालय बेकार, टूटी चौकी पर सोते हैं छात्र

Published at :14 Jan 2015 7:57 AM (IST)
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शौचालय बेकार, टूटी चौकी पर सोते हैं छात्र

बहरागोड़ा : कल्याण विभाग के तहत संचालित बहरागोड़ा हाई स्कूल का आदिवासी बाल छात्रवास वर्षो से सरकारी उपेक्षा का दंश ङोल रहा है. एनएच 33 से सटे इस छात्रवास में दूर-दराज के गांवों के 40 आदिवासी छात्र रहते हैं और स्कूल में पढ़ते हैं. कल्याण विभाग द्वारा इन्हें सुविधाएं नहीं दी गयी हैं. स्थिति यह […]

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बहरागोड़ा : कल्याण विभाग के तहत संचालित बहरागोड़ा हाई स्कूल का आदिवासी बाल छात्रवास वर्षो से सरकारी उपेक्षा का दंश ङोल रहा है. एनएच 33 से सटे इस छात्रवास में दूर-दराज के गांवों के 40 आदिवासी छात्र रहते हैं और स्कूल में पढ़ते हैं.
कल्याण विभाग द्वारा इन्हें सुविधाएं नहीं दी गयी हैं. स्थिति यह है कि रसोइया की मनमानी से छात्रों को महीने में 20 दिन खुद ही भोजन बनाना पड़ता है. भोजन बनाने के लिए छात्रों को 40 रुपये लीटर की दर से केरोसिन खरीदना पड़ता है.
सोलर लाइट व्यवस्था चौपट
छात्रवास में बिजली की समस्या दूर करने के लिए कई लाख की लागत से सोलर लाइट की व्यवस्था की गयी थी. यह व्यवस्था चौपट हो गयी है. छात्रवास की छत पर कई सोलर दर्शन की वस्तु बने हैं. वहीं सभी बैटरियां खराब हो गयी है. इन दिनों तीन से चार घंटा ही बिजली मिल रही है. ऐसे में छात्रों को लालटेन जलाने के लिए 40 रुपये लीटर केरोसिन खरीदना पड़ रहा है.
वर्षो से शौचालय पड़ा है बेकार
इस छात्रवास की विडंबना है कि यहां का छात्रवास कई साल से बेकार पड़ा है. ऐसे में छात्रों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है. बरसात के दिनों तो छात्रों की परेशानी और भी बढ़ जाती है. छात्रों ने कल्याण विभाग से कई बार गुहार लगायी, परंतु शौचालय की मरम्मत की कोई पहल नहीं हुई.
टूटी हुई चौकी पर सोते हैं
इस छात्रवास में वर्षो पूर्व चौकी दी गयी थी. स्थिति यह है कि सभी चौकी टूट गयी है. चौकी में छात्रों ने ईंटों का सहारा दिया और तब जाकर इस पर सोते हैं.
चंदा से खरीदते हैं खेल सामग्री
इस छात्रवास में कल्याण विभाग द्वारा वर्षो से खेल सामग्री नहीं दी गयी है. ऐसे में छात्र आपसी चंदा से खेल सामग्री खरीदते हैं.
खुद बनाते हैं भोजन
छात्रवास के रसोइया असित माइती की मनमानी से छात्रों को महीने में 20 दिन खुद ही भोजन बनाना पड़ता है. छात्रों ने बताया कि रसोइया महीना में मुश्किल से 10 दिन आता है. वह भी समय से नहीं, इसलिए उन्हें भी भोजन बनाना पड़ता है.
छात्र खरदीते हैं 40 रुपये लीटर केरोसिन तेल
इस छात्रवास के छात्रों के लिए राशन कार्ड नहीं बनाया गया है, इसलिए इन्हें सरकारी दर से केरोसिन या फिर चावल नहीं मिलता है. भोजन बनाने के लिए छात्रों को काला बाजार में 40 रुपये लीटर की दर से केरोसिन खरीदना पड़ता है.
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