चाकुलिया :लेडी टार्जन ने कहा, सोचा नहीं था, इतना बड़ा सम्मान मिलेगा यह मेरे लिए गर्व का क्षण है

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जमशेदपुर/चाकुलिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड में ‘जंगल बचाआे अभियान’ की नायिका व लेडी टार्जन के नाम से विख्यात जमुना टुडू को केंद्र सरकार ने सामाजिक कार्य व पर्यावरण के लिए पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की है. इसे लेकर जमुना टुडू ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि उन्होंने कभी नहीं […]

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जमशेदपुर/चाकुलिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड में ‘जंगल बचाआे अभियान’ की नायिका व लेडी टार्जन के नाम से विख्यात जमुना टुडू को केंद्र सरकार ने सामाजिक कार्य व पर्यावरण के लिए पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की है. इसे लेकर जमुना टुडू ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि पद्मश्री जैसा बड़ा सम्मान उन्हें मिलेगा.
उन्होंने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभायी. पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाते हुए अपने साथ महिलाआें काे जाेड़ती गयीं. इसके बाद कारवां बनता गया. महिलाएं अगर किसी काम में निष्ठा से लग जायें, ताे उसमें सफलता अवश्य मिलती है. मेरे पास कहने काे शब्द नहीं है, लग रहा है कि काेई सपना देख रही हूं. इतना बड़ा सम्मान अपने आपमें गर्व की बात है. जब दिल्ली जाऊंगी, ताे सरकार से अपील करूंगी कि वह पर्यावरण संरक्षण के लिए गांव-गांव में समितियां बनाये. साथ ही शहराें में पाैधराेपण पर जोर दिया जाये.
प्रभात खबर ने शुरू से हौसला बढ़ाया
पद्मश्री से नवाजे जाने से मुझे काफी खुशी हुई है. यह सम्मान हमारी सहयोगी महिलाओं का है. उनके प्रयास से 18 वर्षों से जंगल बचाओ आंदोलन चल रहा है.
पर्यावरण की रक्षा जरूरी है. पर्यावरण का प्रदूषित होना जीव के लिए घातक है. पर्यावरण तभी सुरक्षित रहेगा, जब हम वनों की रक्षा करेंगे व पौधे रोपेंगे. मेरा व मेरी सहयोगी महिलाओं का हौसला बढ़ाने में प्रभात खबर ने प्रारंभ काल से ही अहम भूमिका अदा की. इसके कारण यह आंदोलन तेज हुआ और पूरे जिले में फैल गया. हम सभी वृक्षों की रक्षा करने व पौधरोपण का संकल्प लें. ऐसा होगा, तभी जीव-जंतु सुरक्षित रहेंगे.
जमुना टुडू का परिचय
जमुना टुडू का जन्म रायरंगपुर (ओड़िशा) स्थित जामदा प्रखंड के रागांमाटिया गांव में हुआ था. 1998 में उनकी शादी चाकुलिया के मुटुरखाम के बेड़ाडीह टोला निवासी मानसिंह टुडू के साथ हुई. पर्यावरण रक्षा का पाठ उन्होंने अपने माता-पिता से सीखा. ससुराल में आकर वनों की रक्षा का बीड़ा उठाया. मैट्रिक पास जमुना टुडू वर्ष 2000 में मुटुरखाम वन सुरक्षा समिति की अध्यक्ष बनीं. इसके बाद समिति में महिलाओं को जोड़कर वनों की सुरक्षा में जुट गयीं.
महिलाओं के साथ शराबबंदी अभियान चलाया
जमुना टुडू ने शराब बंदी के लिए भी अभियान चलाया. महिलाओं को एकजुट कर विभिन्न गांवों में शराब के खिलाफ रैली निकाली. अवैध शराब बनाने व विक्रेताओं को चेताया. महिलाओं के नेतृत्व में शराब भट्ठियां तोड़ीं. इसके कारण अनेक गांव शराब से मुक्त हुए.
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