खानापूर्ति के लिए अनुसंधान न करें कृषि वैज्ञानिक : डॉ सिंह

Updated at : 19 Apr 2018 5:28 AM (IST)
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खानापूर्ति के लिए अनुसंधान न करें कृषि वैज्ञानिक : डॉ सिंह

30 जून से पहले बीज उत्पादन व अनुसंधान को करें पूरा इसके बाद अनुसंधान करने पर किसानों के साथ धोखा अरहर की खेती टपक सिंचाई पद्धति से करें किसान गालूडीह : गालूडीह स्थित दारीसाई क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र सभागार में बुधवार को अनुसंधान एवं परामर्शदात्री समिति ने खरीफ फसल पर बैठक की. इसकी अध्यक्षता बीएयू के […]

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30 जून से पहले बीज उत्पादन व अनुसंधान को करें पूरा

इसके बाद अनुसंधान करने पर किसानों के साथ धोखा
अरहर की खेती टपक सिंचाई पद्धति से करें किसान
गालूडीह : गालूडीह स्थित दारीसाई क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र सभागार में बुधवार को अनुसंधान एवं परामर्शदात्री समिति ने खरीफ फसल पर बैठक की. इसकी अध्यक्षता बीएयू के शश्य विभागाध्यक्ष डॉ एसएस यादव ने की. इसमें मुख्य अतिथि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक (अनुसंधान) डॉ डीएन सिंह उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिक सिर्फ खानापूर्ति के लिए अनुसंधान न करें. टाइम बांड में काम होनी चाहिए. बीज उत्पादन और अनुसंधान 30 जून तक हो जाना चाहिए. अगर यह काम जुलाई-अगस्त में करते हैं तो किसानों के साथ धोखा है. कृषि वैज्ञानिक किसानों के हित में काम करें. ऐसी तकनीक दें, जिससे किसानों को फायदा हो सके. उन्होंने कहा अरहर की टपक सिंचाई करें. इससे फायदा होगा. काम के नाम पर कोई समझौता नहीं कर सकते.
देर से अनुसंधान करेंगे, तो उत्पादन में कमी आयेगी.
तेजी से मौसम में हो रहा बदलाव, वर्षा जल संचय पर जोर : बैठक में तेजी से मौसम में हो रहे बदलाव पर कृषि वैज्ञानिकों ने चर्चा की. मौसम वैज्ञानिक डॉ ए वदुद और विनोद कुमार ने कहा कि झारखंड में तेजी से क्लाइमेट चेंज हो रहा है.
कई वर्षों से देखा जा रहा है मई में अधिक बारिश होती है. प्री मॉनसून के पूर्व मार्च-अप्रैल में 115 मिमी तक बारिश होती है. वर्ष 2017 के मई में 219 मिमी बारिश हुई थी. बाद में बारिश कम हुई. इससे खेती प्रभावित होती है. वर्षा जल संचय पर जोर देने को कहा गया. कम पानी वाले खेती को अपनाने पर जोर दिया गया.
कृषि वैज्ञानिकों ने पेश की वार्षिक रिपोर्ट: दारीसाई के कृषि वैज्ञानिकों ने पिछले वर्ष खरीफ फसल की रिपोर्ट पेश की. बैठक में विभागाध्यक्ष मौसम विभाग डॉ ए वदुद, विभागाध्यक्ष (अनुवांषिक) जेडए हैदर, विभागाध्यक्ष मृदा विभाग डॉ डीके शाही, विभागाध्यक्ष उद्यान विभाग डॉ केके झा, वरीय कृषि वैज्ञानिक कीट विभाग पीके सिंह, हेम चंद्र लाल, दारीसाई केंद्र के सह निदेशक डॉ जिबरा टोप्पो, डॉ मनोज वर्णवाल, विनोद कुमार, डॉ नरेश यादव, शंभु शरण, पवन झा, उदय प्रसाद, डॉ रजक, चाईबासा केबीके के प्रमोद कुमार, दारीसाई केबीके की डॉ आरती वीणा एक्का, भूषण प्रसाद, गोदरा मार्डी, किसान खुदीराम महतो, मोतीलाल मांझी, हरी पद महतो, लखी कांत महतो आदि उपस्थित थे.
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