बैधनाथ ने ओड़िया साहित्य को दी नयी दिशा

बहरागोड़ा : बहरागोड़ा की साकरा पंचायत के शासन गांव निवासी दिवंगत ओड़िया साहित्यकार पंडित बैद्यनाथ मिश्रा ओड़िया साहित्याकाश के ऐसे अमर पुष्प हैं, जिनकी सुंगध हमेशा अमंद रहेगी. वे अपने साहित्य सुमन सौरभ से सभी को सुभोशित करते रहेंगे. किसी उपवन में प्रथम पुष्प व हार में प्रथम मणी का जो स्थान होता है. वही […]
बहरागोड़ा : बहरागोड़ा की साकरा पंचायत के शासन गांव निवासी दिवंगत ओड़िया साहित्यकार पंडित बैद्यनाथ मिश्रा ओड़िया साहित्याकाश के ऐसे अमर पुष्प हैं, जिनकी सुंगध हमेशा अमंद रहेगी. वे अपने साहित्य सुमन सौरभ से सभी को सुभोशित करते रहेंगे. किसी उपवन में प्रथम पुष्प व हार में प्रथम मणी का जो स्थान होता है. वही स्थान ओड़िया साहित्य में पंडित बैद्यनाथ मिश्रा का है. उन्होंने अपनी लेखनी से ओड़िया साहित्य को एक नयी दिशा और दशा दी. उनकी लेखनी में आजादी के लिए जोश भी था तो सामाजिक कुरीतियों जैसे सती प्रथा, बलि प्रथा पर कुठाराघात करता है. अपनी लेखनी से उन्होंने प्रेम को एक अलग रूप में परिभाषित किया.
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